बलिदान दिवस पर विशेष आलेख

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धोखे से कैद कर राजा नाहर सिंह को अंग्रेजो ने दी थी फांसी  ;– रामवीर सिंह तोमर 

छोटी सेना के बल पर अंग्रेजों को रगड़वाई थी नाक

मथुराlजब आजादी की लड़ाई का जिक्र होगा, तब बल्लभगढ़ रियासत के महान योद्धा राजा नाहर सिंह का जिक्र भी जरुर होगा। प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम जिसे 1857 की महान क्रांति के नाम से जाना जाता है। इसमें बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह अग्रणी क्रांतिकारियों में थे। वीर योद्धा  राजा नाहर सिंह को 9 जनवरी 1858 को लालकिले के सामने चांदनी चौक में ब्रिटिश सरकार के विरूद्ध विद्रोह के आरोप में फांसी पर लटकाया गया था। उनके साथ ही उनके विश्वस्त साथियों गुलाब सिंह सैनी और भूरा सिंह को भी फांसी दी गई थी। राजा नाहर सिंह के संघर्ष की कहानी खून और आंसुओं की है। उनका बलिदान अनूठा और प्रेरणादायक है। 6 अप्रैल 1821 को राजा बलराम सिंह तेवतिया के घर जन्में नाहर सिंह का विवाह कपूरथला घराने की राजकुमारी किशन कौर से हुआ था। 18 वर्ष की आयु में 20 जनवरी 1839 को बसंत पंचमी के दिन इनका राज्यारोहण हुआ। मात्र 36 वर्ष की आयु में 9 जनवरी 1858 को महान योद्धा राजा नाहर सिंह को धोखे से फांसी पर लटका दिया था।

वीर योद्धा के सामने अंग्रेजों ने कई बार टेके घुटने;अंग्रेजी सरकार को राजा नाहर सिंह से खतरा दिखाई देने लगा था, इसके बाद राजा नाहर सिंह और अंग्रेजों के बीच कई बार लड़ाई हुई। 

और छोटी सेना के बल पर अंग्रेजों को नाक रगड़वाई दी थी। इस बीच लगातार अंग्रेजों के साथ टकराव जारी रहा। इसी बीच 10 मई 1857 में अंबाला और मेरठ में सैनिक विद्रोह की चिंगारी भड़क गई थी जिससे देश भर में बगावत के सुर बुलंद हो रहे थे। राजा नाहर सिंह निडर और बहादुर राजा थे। 

राजा साहब न केवल तलवार के धनी थे बल्कि शासकीय कूटनीति में भी दक्ष थे। उन्होंने कई बार अंग्रेजी हुकूमत के साथ जमकर मुकाबला किया था और हर बार अंग्रेजी हुकूमत को हार का सामना करना पड़ा था।  राजा नाहर सिंह की रणनीति से अंग्रेजी हुकूमत काफी परेशान थी। इसके बाद अंग्रेजों ने राजा नाहर सिंह के खिलाफ षड्यंत्र रचने शुरू कर दिए थे। उसके बाद अंग्रेजों ने षड्यंत्र के तहत एक दूत राजा नाहर सिंह के पास संदेश भेजा कि वह बहादुर शाह जफर से संधि करना चाहते हैं. संदेश मिलते ही राजा नाहर सिंह दिल्ली पहुंच गए और जैसे ही लाल किले के अंदर घुसे इस दौरान अंग्रेजी सेनाओं ने उन्हें धोखे से गिरफ्तार कर लिया।  इसके बाद उन पर सरकारी खजाने को लूटने का केस दर्ज किया गया। इलाहाबाद कोर्ट में ये केस चला । सरकारी खजाना लूटने के आरोप में दोषी ठहराते हुए राजा नाहर सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई।  इसके बाद मात्र 36 साल की उम्र में महान योद्धा राजा नाहर सिंह को 9 जनवरी 1958 को चांदनी चौक के बीच चौराहे पर फांसी दी गई थी। महान योद्धा राजा साहब की याद में 9 जनवरी को शहादत दिवस के रूप में मनाया जाता है। फरीदाबाद में उनके नाम से राजा नाहर सिंह स्टेडियम बनाया गया. बल्लभगढ़ मेट्रो स्टेशन का नाम राजा नाहर सिंह मेट्रो स्टेशन रखा गया है। कई पार्क राजा नाहर सिंह के नाम से बनाए गए हैं । आज भी राजा नाहर सिंह का महल फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में मौजूद है जिसे अब सरकार टूरिज्म प्लेस के रूप में प्रयोग करती है। इसके अलावा आज भी राजा नाहर सिंह के वंशज उनकी धरोहर को राजा नाहर सिंह महल में संयोजे हुए हैं।

देश के लिए बलिदान देने वाले महान योद्धा को सादर शत शत नमन!

लेखक जाट संसार पत्रिका के लेखक, सामाजिक चिंतक और किसान नेता हैं!