कनाडा में 281 किलो कोकीन तस्करी केस: भारतीय ड्राइवर बरी, कोर्ट ने कहा ‘ब्लाइंड कूरियर’; खालिस्तान लिंक पर बहस तेज

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कनाडा के ओंटारियो प्रांत की सार्निया (Sarnia) अदालत ने भारतीय मूल के 24 वर्षीय ट्रक ड्राइवर और पूर्व अंतरराष्ट्रीय छात्र रविंदरबीर सिंह को 281 किलोग्राम (इंटरकनेक्टेड पैकेजिंग सहित 333 किलोग्राम) कोकीन तस्करी के मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि आरोपी को ट्रक में छिपाई गई ड्रग्स की जानकारी थी। रविंदरबीर सिंह वर्ष 2022 में स्टूडेंट वीजा पर कनाडा पहुंचे थे। मार्च 2025 में जब वह अमेरिका-कनाडा सीमा पर स्थित ब्लू वॉटर ब्रिज से ट्रक लेकर प्रवेश कर रहे थे, तब सीमा सुरक्षा अधिकारियों ने उनके ट्रेलर की तलाशी ली। तलाशी के दौरान 281 कोकीन की ईंटें बरामद हुईं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 50 लाख से 3.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 41 करोड़ से 280 करोड़ रुपए) बताई गई।

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस मार्क पोलैंड ने कहा कि जिस डिपो से रविंदरबीर ने प्लास्टिक रेजिन का माल उठाया था, वहां उनका ट्रेलर करीब सात घंटे तक बिना सील और उनकी निगरानी के बाहर खड़ा रहा। ऐसे में यह संभावना पूरी तरह से खारिज नहीं की जा सकती कि किसी तीसरे व्यक्ति ने उनकी जानकारी के बिना ट्रेलर में ड्रग्स छिपा दी हो।अदालत ने अपने फैसले में यह भी माना कि रविंदरबीर सिंह संभवतः अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के तथाकथित “ब्लाइंड कूरियर” घोटाले का शिकार हुए। इस तरीके में अपराधी संगठनों द्वारा ट्रक चालकों या परिवहन कर्मियों को बिना उनकी जानकारी के ड्रग्स ले जाने के लिए मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

इस फैसले के बाद कनाडा में सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। कुछ लोगों ने इसे कनाडा की छात्र वीजा और आव्रजन नीति से जोड़ते हुए आलोचना की है। वहीं अन्य लोगों का कहना है कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है। सोशल मीडिया पर कुछ पोस्टों में आरोपी को “खालिस्तानी” बताया जा रहा है और मामले को खालिस्तान समर्थक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस मामले में किसी अदालत या कनाडाई एजेंसी ने रविंदरबीर सिंह को खालिस्तानी संगठन से जुड़ा घोषित नहीं किया है। इसलिए ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।  फिलहाल यह मामला कनाडा की न्यायिक प्रक्रिया, सीमा सुरक्षा और आव्रजन नीति को लेकर नई बहस का विषय बन गया है।

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