इलाहाबाद: हाई कोर्ट ने आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल पर लगे आरोप को लेकर गहरी चिंता जाहिर की है। दरअशल सीनियर IAS अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल पर एक ट्रायल जज ने आरोप लगाया कि ज़मीन से जुड़े एक लंबे समय से लंबित मामले में फोन कॉल के ज़रिए उनपर दबाव बनाने की कोशिश की थी। जिला न्यायाधीश को लिखे एक पत्र में, सिविल जज ने आरोप लगाया कि IAS अधिकारी ने फ़ोन पर बातचीत के दौरान उन पर दबाव बनाने की कोशिश की।
पेंडिग केस पर चर्चा की कोशिश-जज ने पत्र में कहा कि आईएएस अधिकारी ने उनसे उनकी छुट्टी के बारे में सवाल किए और एक पेंडिंग केस पर चर्चा करने की कोशिश की। इस मामले में IAS अधिकारी का कहना है कि उन्होंने केस के गुण-दोष पर चर्चा करने की कोशिश नहीं की थी, बल्कि वे सिर्फ़ यह जानना चाहती थीं कि जज मामले की सुनवाई कब फिर से शुरू करेंगी।
हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया-इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 21 अगस्त को इस मामले को बहुत ही गंभीरता से लिया। जस्टिस सैयद कमर हसन रिज़वी ने कहा, “कथित टेलीफ़ोनिक बातचीत के लहज़े और भाषा से साफ़ पता चलता है कि कोर्ट के पीठासीन अधिकारी को प्रभावित करने की कोशिश की गई और इससे उन्हें बुरा लगा… यह हैरान करने वाली बात है कि कोई पक्षकार इस तरह फ़ोन करके कोर्ट से संपर्क कर सकता है, और वह भी उस कोर्ट में चल रहे किसी पेंडिंग मामले के सिलसिले में।
गोंडा में जमीन से जुड़ा मामला-यह मामला गोंडा में ज़मीन के कब्ज़े से जुड़े विवाद का था। स्थानीय अधिकारियों का कहना था कि यह ज़मीन सरकारी इस्तेमाल के लिए रिज़र्व थी, और इसके बावजूद उस पर एक स्कूल बना दिया गया। यह मामला 1997 से लंबित है। हाल ही में, ज्योति विद्या मंदिर स्कूल ने मामले को देवी पाटन मंडल डिवीज़न के बाहर की किसी कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की। स्कूल का आरोप था कि सरकारी अधिकारी उसके पदाधिकारियों को धमका रहे थे और ट्रायल कोर्ट पर दबाव डाल रहे थे कि वे मामले की सुनवाई इस तरह करें जिससे उन्हें फ़ायदा हो।




















