इस्लामाबाद:आर्थिक संकट, विदेशी मुद्रा की कमी और बढ़ते कर्ज के दबाव से जूझ रहा पाकिस्तान अब BRICS के जरिए अपने लिए नए आर्थिक और कूटनीतिक रास्ते तलाश रहा है। इस्लामाबाद ने नवंबर 2023 में BRICS की सदस्यता के लिए औपचारिक रूप से आवेदन किया था, लेकिन अब तक उसे समूह में जगह नहीं मिली है। पाकिस्तान के लिए मुश्किल सिर्फ सदस्यता की शर्तें नहीं, बल्कि भारत के साथ उसके तनावपूर्ण रिश्ते भी हैं। BRICS में भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका शुरुआती प्रमुख सदस्य रहे हैं। बाद में समूह का विस्तार हुआ और मिस्र, इथियोपिया, ईरान तथा संयुक्त अरब अमीरात समेत कई नए देश इसमें शामिल हुए। समूह के विस्तार के साथ इसका आर्थिक और कूटनीतिक महत्व भी लगातार बढ़ा है।
क्यों BRICS के लिए मरा जा रहा पाकिस्तान?
पाकिस्तान की BRICS में दिलचस्पी केवल कूटनीतिक पहचान हासिल करने तक सीमित नहीं है। उसकी सबसे बड़ी नजर आर्थिक फायदे पर है। लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और वित्त जुटाने के लिए नए रास्ते तलाश रहा है। इस्लामाबाद को उम्मीद है कि BRICS में शामिल होने से उसे उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापारिक रिश्ते मजबूत करने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा वह समूह से जुड़े वित्तीय संस्थानों के जरिए विकास परियोजनाओं के लिए धन जुटाने के विकल्प भी बढ़ाना चाहता है। पाकिस्तान के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक उसकी आर्थिक वृद्धि दर 3.70 प्रतिशत रही है। ऐसे में इस्लामाबाद के लिए BRICS जैसा बड़ा आर्थिक मंच अतिरिक्त निवेश और व्यापार के अवसरों के लिहाज से आकर्षक है।




















