लोक पर्व शिव अंगिका, अर्द्धनारीश्वर व कृष्ण नवरस को समर्पित कथक नृत्य, लोक-जन जातीय गीतों नृत्यों का प्रभावी प्रस्तुतियाँ

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प्रयागराजl शिव-पार्वती के अर्द्धनारीश्वर रुप को समर्पित लास्य व ताण्डव, नटराज रुप में सृष्टि के संतुलन को दर्शाला शिव अंगिका, एवं कृष्ण चरित में नव रसो को अभिव्यक्ति देती ग्वालियर घराने की ठसक भरी कथक नृत्य की प्रस्तुति एवं आंचलिक भजनानंद की स्वलहरियों ने मध्य प्रदेश शासन द्वारा आयोजित लोकपर्व की सांस्कृतिक संध्या को नयनाभिराम बना दिया।

मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा महाकुम्भ सेकटर-07 में आयोजित ‘लोकपर्व की सांस्कृतिक संध्या का शुभारम्भ ग्वालियर घराने की प्रसिद्ध विदुषी कथक नृत्यांगना सुलेखा भट्ट एवं दल के कथक नृत्य से हुआ। नटराज रूप में ब्रह्माण्ड में संतुलन को दर्शाता आंगिक व यौगिक अभिनय को समर्पित ‘शिव अंगिका’ नृत्य, आदिदेव शिव के अर्द्धनारीश्वर रूप को जिसमें उन्होंने पार्वती से विवाह के बाद उसे दो भागो ताण्डव व लास्य में विभक्त किया था, ग्वालियर घराने की रौद्र व श्रृंगार मिश्रित शैली में कथक नृत्य, कृष्णचरित को नवरसों के द्वारा अभिव्यक्ति देता ‘कृष्ण नवरस तथा ध्रुपद गायन को यति शैली में 28 मात्राओं व राग मालकौश में निबद्ध स्वर, ताल, पद, गति और अलंकारों के इन्द्रधनुषी रुप को दर्शाता कथक नृत्य की मंचीय प्रस्तुति ने उपस्थित जन समूह को मंत्र मुग्ध कर दिया। इस नृत्य के कलाकारो में क्षमा

मालवीय, प्रियांशी कटारिया, प्रेक्षानेमा, प्रियंका मित्तल, अन्वेशिता सिंह प्रमुख थी। मध्य प्रदेश के विविधि अंचलों की वाचिक भजनानंद की मधुरिम स्वरलहरियों ने भी परिवेश को मधुर बना दिया। देव एकादशी से शुरू होकर लगातार तीन महीने तेरह दिन तक चलने वाला तथा महाशिवरात्रि को समाप्त होने वाला धार्मिक नृत्य, काठी एवं बुन्देलखण्ड का भक्ति संगीत एवं कार्तिक पूणिमा से बैशाख माह तक होने वाला जनजातीय नृत्य भड़म ने भी तीर्थयात्रियों व उपस्थित जनसमूह को भरपूर आनांदित किया।