संपादकीय
जीवन का सब वार है कविता,
कविता जीवन का आधार ।
बिना इसके जीवन में बोलो,
कहां उमड़ता मन का द्वार ।
जीवन का रसधार है कविता ,
कविता से सब बात बने ।
कविता बिन किसका जीवन है ,
जरा बताओ मुझे जरा ।
तो बात हो रही है महिला काव्य गोष्ठी विशेषांक की । हर मोड़, हर जोड़, हर तोड़ का आधार है कविता । कविता मनुष्य जीवन की अनमोल निधि है। बिना इसके जीवन में रस कहां ? जीवन को रसाधार बनती है कविता । कविता में जीवन का सारा परावार निहित है , बस देखने और समझने की दृष्टि चाहिए । इस विशेषांक से कुछ बानगी
पहली बानगी
अंधियारे मन के कोनों में,
थोड़ी सी रौशनी लाएं,
भूले सपनों की पगडंडी पर,
आओ फिर से दिया जलाएं।
दूसरी बानगी
अंधेरों से लड़ने का संदेश लाती दीवाली,
हर दिल में उजियारा भर जाती दीवाली।
तीसरी बानगी
आओ सखी करवा चौथ पर, कर ले सोलह सिंगार,
माथे कुमकुम पांव महावर, पायलिया करे झंकार।
महिला काव्य गोष्ठी विशेषांक का यह सफर चल रहा है और चलता रहेगा । नारी मन के सुंदर उद्गार से लबरेज इस विशेषांक को देखिए, समझिए और बताइए कि यह अंक आपको कैसा लगा, प्रतिक्रिया जरूर दीजिए ।
अंत में –
दोपहर की धूप में,
बातें बहुत सी रह गई ।
यह सिला चलता रहे ,
बस यही कामना मेरी ।
✒️उमेश श्रीवास्तव



















