प्रयागराजlमौका था हिंदुस्तानी अकादमी के सभागार में प्रख्यात शायरा कवियत्री प्रीता बाजपेई जी के ग़ज़ल संग्रह सर पे आसमान तो है का लोकार्पण समारोह जिसमें भारी संख्या में प्रयागराज के शायर ,कवि, कवियत्री एवं प्रबुद्ध जन उपस्थित हुए।
बतौर मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति सुधीर नारायण जी ने कहा कि प्रीत बाजपेई जी की गजल संग्रह सर पे आसमान तो है में प्रेम और सौहार्द के साथ-साथ समाज की सच बयानी भी मिल रही है। उन्होंने प्रीता जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इनके अंदर त्याग की भावना के साथ साथ प्रेम उल्लास और उत्साह भरा हुआ है जो इन्हें जीने की कला सिखाती है,।
बतौर रचनाकार प्रीता वाजपेई ने सभी के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि यह गजल संग्रह मेरे लिए सिर्फ संग्रह नहीं बल्कि मेरे साहित्यिक योगदान का अंग है उन्होंने अपनी संग्रह से
मैं मुतमईन हूं खुदा मुझ पर मेहरबान तो है,
जमीन पैरों तले सर पे आसमान तो है
जब इस शेर को पढ़ा तो सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
सारस्वत अतिथि डॉ पी,के सिन्हा सेवानिवृत्ति मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि प्रीता बाजपेई बहुमुखी प्रतिभा की धनी है इनकी उपलब्धियां हम लोगों की उपलब्धियां है।
प्रख्यात शायर श्री अनवर अब्बास जी ने अपनी तकरीर में कहा कि प्रीता जी की ग़ज़ल संग्रह सर पे आसमान तो है में समाज की फिक्र के साथ-साथ बदलते चेहरों की दास्तां भी है
इन्होंने अपने मजमुए में पाठक गण के साथ-साथ गजलों में मंचों को भी जिंदा रखा है। बहुत कम ऐसे रचनाकार मिलते हैं जो मंच के साथ-साथ पाठक के बीच भी उपस्थित रहे।
लखनऊ से पधारे प्रख्यात शायर श्री राम प्रसाद बेखुद जी ने उक्त गजल संग्रह पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रीता जी की ग़ज़ल समाज के लिए दवा का काम करेगी। क्योंकि समाज में हो रही घटनाओं पर चोट करती हुई उनकी शायरी नि .संदेह समाज को संदेश देने का काम कर रही है।
विचार रखते हुए प्रतापगढ़ से पधारे श्री अंजनी कुमार सिंह ने प्रीता जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रीता जी की रचनाओं में समाज के दुख दर्द के साथ-साथ सुख की अनुभूतियां भी है।
विषय वस्तु रखते हुए प्रीता बाजपेई जी के विषय में और उनके जीवन के पहलुओं को डॉक्टर सैयद हसन सिद्दीकी जी ने अपनी शायरी और कविता के माध्यम से उकेरते हुए कहा कि
प्रीता बाजपेई जी के अंदर प्रेम वात्सल्य और लालित्य के साथ साथ साहित्यिक जिजीविशा भी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अवकाश प्राप्त आ,ई,एस आर एस वर्मा जी ने प्रीता वाजपेई की भूरि भूरि प्रशंसा करते हुए कहा सर पे आसमान तो है ग़ज़ल संग्रह साधारण नहीं यह समाज के हितों की रक्षा करने वाला और नैतिक मूल्यों को स्थापित करने वाला संग्रह है।
कार्यक्रम का संचालन रवि कुमार मिश्रा जी ने किया,
वाणी वंदना डॉक्टर आभा श्रीवास्तव मधुर एवं गणपति वंदना शुभांगिनी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रदीप चित्रांशी ने किया।
आए हुए अतिथियों का स्वागत प्रीता बाजपेई जी ने किया उन्होंने सभी अतिथियों को अंग वस्त्र, स्मृति चिन्ह एवं बुके भेंट कर सम्मानित किया।
उक्त अवसर पर जया मोहन जी, वज़ीर खान, शैलेंद्र अवस्थी, उमेश श्रीवास्तव, शैलेंद्र मधुर, जितेंद्र मिश्र जलज, मोहिनी श्रीवास्तव, शाहिद इलाहाबादी, रुस्तम इलाहाबादी, आसिफ उस्मानी, रचना सक्सेना, उपेंद्र पांडेय, विवेक सत्यांशु, सुनील दानिश, रंजन पांडे, दिव्य दर्शन जोशी, सहित अन्य गणमान्य लोगों उपस्थित रहे।


















