उच्च शिक्षा में नए आयाम स्थापित कर रही है नारी शक्ति: राज्यपाल आधुनिकता को अपनाएँ परन्तु संस्कृति व परंपराओं से विच्छिन्न न हों- मालिनी अवस्थी, उ0 प्र0 राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के 21वां दीक्षान्त समारोह में 26 को मिले गोल्ड मेडल

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प्रयागराज, 17 जुलाई। उ0 प्र0 राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज का 21वां दीक्षान्त समारोह शुक्रवार को सरस्वती परिसर स्थित अटल प्रेक्षागृह में आयोजित किया गया। दीक्षान्त समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति माननीया श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने की। मुख्य अतिथि पद्मश्री मालिनी अवस्थी, प्रख्यात भारतीय शास्त्रीय एवं लोक गायिका, लखनऊ दीक्षान्त उद्बोधन दिया। कैबिनेट मंत्री श्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘‘नन्दी’’, उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेंद्र उपाध्याय तथा श्रीमती रजनी तिवारी, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार विशिष्ट अतिथि के रूप में दीक्षान्त समारोह में शामिल हुये।
21वें दीक्षान्त समारोह में विभिन्न विद्याशाखाओं में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले शिक्षार्थियों को 26 स्वर्ण पदक प्रदान किये गयें, जिनमें 20 स्वर्ण पदक छात्राओं तथा 06 स्वर्ण पदक छात्रों की झोली में गये। दीक्षान्त समारोह में सत्र दिसम्बर-2025 तथा जून-2026 की परीक्षा के सापेक्ष उत्तीर्ण 30886 शिक्षार्थियों को उपाधि प्रदान की गयी, जिसमें 17778 पुरूष तथा 13098 महिला शिक्षार्थी रहे। इस अवसर पर राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के कर कमलों से उपाधियों एवं अंक प्रमाणपत्रों को डिजीलॉकर में अपलोड कर प्रसारित किया गया। दीक्षान्त समारोह भारतीय पारम्परिक परिधान में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के 21वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि शिक्षा केवल उपाधि प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सबसे प्रभावी साधन है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा का उपयोग केवल रोजगार तक सीमित न रखें, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ। राज्यपाल ने इस उपलब्धि पर सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने उन लाखों लोगों तक शिक्षा पहुँचाने का सराहनीय कार्य किया है, जो किसी कारणवश अपनी नियमित शिक्षा पूरी नहीं कर सके। उन्होंने विशेष प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस वर्ष सम्मानित 18 मेधावी विद्यार्थियों में 12 छात्राएँ और 6 छात्र हैं। यह उपलब्धि नए भारत में नारी शक्ति की बढ़ती भागीदारी और उत्कृष्टता का सशक्त प्रमाण है। उन्होंने कहा कि जब बेटियाँ अवसर प्राप्त करती हैं तो वे प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश और समाज का गौरव बढ़ाती हैं। राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रारम्भिक शिक्षा मातृभाषा में उपलब्ध कराने तथा कक्षा 6 से ही कौशल विकास आधारित शिक्षा प्रारम्भ करने का उद्देश्य विद्यार्थियों को व्यवहारिक, आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुख बनाना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि उसे जीवन कौशल, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए स्थापित अटल विद्यालयों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय द्वारा उपाधियों को डिजिलॉकर के माध्यम से उपलब्ध कराने की सराहना करते हुए कहा कि इससे समय, धन और संसाधनों की बचत हो रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में समर्थ पोर्टल के प्रभावी उपयोग से अब तक लगभग 200 करोड़ रुपये की बचत हुई है, जो डिजिटल सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण और पारिवारिक मूल्यों को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी अपनी माता के नाम पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगा, बल्कि माता-पिता के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना को भी सुदृढ़ करेगा। राज्यपाल ने समाज में बेटा-बेटी के बीच किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने पर बल देते हुए कहा कि आज भी अनेक परिवार पुत्रों को निजी विद्यालयों में पढ़ाते हैं, जबकि पुत्रियों को सरकारी विद्यालयों में भेजते हैं। यह सोच बदलनी होगी। बेटियों को भी समान अवसर, समान संसाधन और समान शिक्षा मिलनी चाहिए।उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा किशोरियों में एचपीवी वैक्सीन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल भविष्य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री के जनस्वास्थ्य संबंधी प्रयासों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल बताया। अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध सदैव संघर्ष किया है। बाल विवाह रोकने से लेकर सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तक अनेक साहसिक निर्णय लिए गए। उन्होंने विद्यार्थियों से भी अन्याय, भेदभाव और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज़ उठाने तथा समाज सुधार में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की प्रगति के साथ-साथ उसकी कमियों की भी स्पष्ट चर्चा की। उन्होंने कहा कि संस्थान की वास्तविक उन्नति तभी संभव है जब उसकी कमजोरियों को ईमानदारी से स्वीकार कर उनका समाधान किया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालय के सरस्वती, गंगा एवं यमुना परिसरों की स्वच्छता, आधारभूत सुविधाओं तथा संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का विद्यार्थियों के हित में बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यमुना परिसर में भूमि कटाव की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त करते हुए आवश्यक सुरक्षा उपाय शीघ्र किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने अध्ययन केन्द्रों की समीक्षा का उल्लेख करते हुए व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार लाने तथा प्रत्येक अध्ययन केन्द्र को अधिक उत्तरदायी और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने यह भी कहा कि स्मार्ट बोर्ड का वास्तविक उपयोग शिक्षण कार्य में होना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी आधुनिक संसाधनों का उपयोग विद्यार्थियों के हित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के लिए सुनिश्चित किया जाए। अपने संबोधन के अंत में राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल प्रशंसा करना नहीं, बल्कि संस्थान की कमियों की ओर ध्यान आकर्षित कर उन्हें दूर करने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि विश्वविद्यालय परिवार पूर्ण समर्पण, पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ कार्य करेगा तो उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय देश के सर्वश्रेष्ठ मुक्त विश्वविद्यालयों में अपना विशिष्ट स्थान स्थापित करेगा।
दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि एवं सुप्रसिद्ध लोकगायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का समापन नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और जीवन मूल्यों के साथ आगे बढ़ने की नई शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे आधुनिकता को अपनाएँ, परंतु अपनी संस्कृति, परंपराओं और भारतीय मूल्यों से कभी विच्छिन्न न हों। उन्होंने कहा कि प्रयागराज ज्ञान, संस्कृति और सनातन आस्था की पुण्यभूमि है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का त्रिवेणी संगम इस नगर को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशिष्ट बनाता है। यह केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय चेतना का जीवंत प्रतीक है।
पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने कहा कि प्रयागराज का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। मौर्य और गुप्तकाल से लेकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम तक इस भूमि ने देश को अनेक महान विभूतियाँ दी हैं। इसी धरती पर अमर क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आज़ाद ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वाेच्च बलिदान दिया। यह भूमि सदैव त्याग, साहस और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देती रही है। उन्होंने प्रयागराज की शैक्षणिक एवं साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय इसे पूरब का ऑक्सफोर्ड कहा जाता था। महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी श्निरालाश्, सुमित्रानंदन पंत सहित अनेक महान साहित्यकारों ने इसी भूमि से भारतीय साहित्य को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं और राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना को समृद्ध किया।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का नाम भारत रत्न, स्वतंत्रता सेनानी और हिंदी के महान पुरोधा राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन के नाम पर रखा गया है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन हिंदी भाषा, भारतीय संस्कृति और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उनके जीवन का प्रत्येक क्षण त्याग, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति का प्रेरक उदाहरण है। राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन के दृढ़ संकल्प का उल्लेख करते हुए मालिनी अवस्थी ने कहा कि विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार के आंदोलन के दौरान उन्होंने केवल इसलिए चीनी का त्याग कर दिया क्योंकि उसका नाम श्चीनीश् था। इसी प्रकार दांडी यात्रा के समय उन्होंने स्वयं नमक का त्याग कर राष्ट्र के प्रति अपने समर्पण का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे टंडन जी के जीवन मूल्यों और चरित्र का थोड़ा-सा अंश भी अपने जीवन में उतार लें, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय की मुक्त एवं समावेशी शिक्षा व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय ज्ञान को सीमित परिसरों से निकालकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का एक भगीरथ प्रयास कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं, श्रमिकों तथा उन लोगों को उच्च शिक्षा से जोड़ना, जो परिस्थितियोंवश नियमित शिक्षा से वंचित रह गए थे, विश्वविद्यालय का अत्यंत सराहनीय कार्य है।
उन्होंने विशेष रूप से उन माताओं, श्रमिकों, किसानों और ग्रामीण युवाओं का अभिनंदन किया जिन्होंने कठिन परिस्थितियों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और आर्थिक चुनौतियों के बीच अपनी पढ़ाई पूरी की। उन्होंने कहा कि ऐसे विद्यार्थियों की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की प्रेरक गाथा है। उनका सम्मान सामान्य परिस्थितियों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों से भी अधिक है। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत का अर्थ शिक्षा का अंत नहीं है। यह वह क्षण है जब विद्यार्थी पुस्तकीय ज्ञान को अपने आचरण, व्यवहार और जीवन में उतारते हैं। शिक्षा तभी सार्थक होती है जब वह व्यक्ति को विवेक, विनम्रता और मानवीय संवेदनाओं से समृद्ध बनाए। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कंप्यूटर और आधुनिक तकनीकों में दक्ष बनें, क्योंकि समय की यही आवश्यकता है। किन्तु उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई वृक्ष अपनी जड़ों से कट जाता है तो वह पहली ही आँधी में गिर जाता है। उसी प्रकार यदि युवा अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं से दूर हो जाएंगे तो उनका व्यक्तित्व भी कमजोर पड़ जाएगा। आधुनिकता और भारतीय संस्कृति का संतुलन ही सफलता का वास्तविक आधार है।
उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा केवल उसके द्वारा प्रदान की गई उपाधियों से नहीं बढ़ती, बल्कि उसके पूर्व विद्यार्थियों के चरित्र, आचरण, ज्ञान, परिश्रम और सामाजिक योगदान से स्थापित होती है। इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी अपने व्यवहार और कार्यों से विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाने का प्रयास करे। उन्होंने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने विश्वविद्यालयों को गाँव गोद लेने, समाज से जोड़ने तथा विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराने जैसी अभिनव पहल की है। यह केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि अंत्योदय और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को व्यवहार में उतारने का प्रेरक उदाहरण है। अंत में पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने सभी उपाधिधारकों एवं स्वर्ण पदक विजेताओं को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि वे अपने ज्ञान, संस्कार, परिश्रम और सेवा भाव के माध्यम से समाज, राष्ट्र और मानवता की उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान दें तथा उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय का नाम देश और दुनिया में गौरवान्वित कयरें।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे संस्कारित, चरित्रवान एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिक तैयार करना है, जो समाज और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें। सच्ची शिक्षा वह है जो व्यक्ति के भीतर नैतिकता, सामाजिक संवेदनशीलता, अनुशासन, चरित्र एवं राष्ट्रभक्ति के संस्कारों का विकास करे और उसे समाज के प्रति उत्तरदायी नागरिक बनाए। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा एक सतत एवं आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है, जिसकी कोई आयु सीमा नहीं होती। निरंतर सीखते रहना ही व्यक्ति को उत्कृष्टता की ओर अग्रसर करता है और यही भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल संदेश भी है।
विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रदेश का एकमात्र मुक्त विश्वविद्यालय है, जो समाज के उन वर्गों तक उच्च शिक्षा पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है, जो विभिन्न कारणों से नियमित शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि युवा अपने ज्ञान, कौशल और संस्कारों से अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के जीवन को आलोकित करें। चुनौतियों से घबराने के बजाय उनका साहसपूर्वक सामना करें, क्योंकि इतिहास उन्हीं लोगों का बनता है जो कठिनाइयों और असफलताओं को अवसर में बदलकर आगे बढ़ते हैं।
प्रारम्भ में कुलपति प्रो0 सत्यकाम ने स्वागत भाषण एवं विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या प्रस्तुत की। 21वें दीक्षान्त समारोह में कुलाधिपति स्वर्ण पदक अध्ययन केन्द्र देव इन्द्रावती महाविद्यालय अम्बेडकरनगर के स्नातक विज्ञान की छात्रा सुश्री रम्या सिंह को दिया गया। रम्या सिंह का पदक राज्यपाल के कर कमलों से उनकी माँ ने ग्रहण किया। सुश्री रम्या ने बी. एस. सी. की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की तथा वे समस्त विद्याशाखाओं की स्नातक एवं स्नातकोत्तर परीक्षाओं में उत्तीर्ण समस्त स्नातक/परास्नातक शिक्षार्थियों में सर्वश्रेष्ठ रहीं। उल्लेखनीय है कि सुश्री रम्या सिंह ने सर्वाधिक चार स्वर्ण पदक प्राप्त किये।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक इस बार स्नातकोत्तर वर्ग में विद्याशाखाओं के 07 टापर्स को दिए। जिसमें मानविकी विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक लाल बहादुर शास्त्री पी0जी0 कालेज गोण्डा अध्ययन केंद्र के एम.ए. (पत्रकारिता एवं जनसंचार) के छात्र शोभित मौर्या को, समाज विज्ञान विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक बी0एम0 मेमोरियल डिग्री कालेज, अम्बेडकरनगर अध्ययन केंद्र के एम.ए. (समाजशास्त्र) की छात्रा श्रेया यादव को, प्रबन्धन अध्ययन विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक अध्ययन केन्द्र विश्वविद्यालय मुख्य परिसर, प्रयागराज के एम0कॉम0 की छात्रा रिदम पाण्डेय को, कंप्यूटर एवं सूचना विज्ञान विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक अध्ययन केन्द्र, विश्वविद्यालय मुख्य परिसर, प्रयागराज के एम0सी0ए0 के छात्र राहुल कुमार मिश्रा को, शिक्षा विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक अध्ययन केंद्र, जी0एस0ए0 कालेज आफ एजूकेशन आगरा के एम.ए. (शिक्षाशास्त्र) की छात्रा कुमारी दीपिका राठौर को, विज्ञान विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक अध्ययन केंद्र राम लगन महाविद्यालय मऊ के एम.एस.सी. (जैव रसायन) की छात्रा हया मतलूब को, स्वास्थ्य विज्ञान विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक अध्ययन केंद्र रघुनाथ गर्ल्स पी0जी0 कालेज, मेरठ के एम0एस0सी0 (फूड एण्ड न्यूट्रीशन) की छात्रा तान्या त्यागी प्रमुख रहीं।
इसी प्रकार स्नातक वर्ग में विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक इस बार विद्याशाखाओं के 06 टापर्स को दिये गये, जिसमें मानविकी विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक अध्ययन केंद्र सरदार पटेल स्मारक महाविद्यालय, अम्बेडकरनगर के बी0ए0 की छात्रा सरिता वर्मा को, समाज विज्ञान विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक अध्ययन केंद्र डॉ0 परशुराम दीनबंधु महाविद्यालय, अम्बेडकरनगर के बी0ए0 की छात्रा आकृति पटेल को, प्रबन्धन अध्ययन विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक अध्ययन केन्द्र रामलगन महाविद्यालय, मऊ के बी0कॉम0 की छात्रा मरियम खानम शाहिद खान को, शिक्षा विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक शिक्षा विद्याशाखा अध्ययन केन्द्र विश्वविद्यालय मुख्य परिसर, प्रयागराज के बी0एड0 (विशिष्ट शिक्षा) के छात्र जितेन्द्र कुमार जायसवाल को, विज्ञान विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक अध्ययन केन्द्र देव इन्द्रावती महाविद्यालय, अम्बेडकरनगर के बी0एस0सी0 की छात्रा रम्या सिंह को, स्वास्थ्य विज्ञान विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक अध्ययन केन्द्र डी0वी0एस0 कालेज, आगरा के बी.एस.सी. (ह्यूमन न्यूट्रीशन) के छात्र कुशाग्र सिंह को प्रदान किया गया।
दीक्षान्त समारोह में इस बार 12 मेधावी शिक्षार्थियों को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दानदाता स्वर्ण पदक से भी सम्मानित किया, जिनमें बाबू ओमप्रकाश गुप्त स्मृति स्वर्ण पदक अध्ययन केन्द्र देव इन्द्रावती महाविद्यालय, अम्बेडकरनगर के बी0एस0सी0 की छात्रा रम्या सिंह को, जोहरा अहमद मिर्जा स्मृति स्वर्ण पदक अध्ययन केन्द्र विश्वविद्यालय मुख्य परिसर, प्रयागराज, के एम.सी.ए. की छात्रा प्रतिभा पाण्डेय को, श्री कैलाशपत नेवेटिया स्मृति स्वर्ण पदक अध्ययन केन्द्र विश्वविद्यालय मुख्य परिसर, प्रयागराज के एम.बी.ए. की छात्रा सुजाता भारती को, स्व0 अनिल मीना चक्रवर्ती स्मृति स्वर्ण पदक स्नातक वर्ग में अध्ययन केन्द्र परशुराम दीनबन्धु महाविद्यालय, अम्बेडकरनगर के बी0ए0 की छात्रा आकृृति पटेल को, स्व0 अनिल मीना चक्रवर्ती स्मृति स्वर्ण पदक स्नातकोत्तर वर्ग में अध्ययन केन्द्र बी0एम0 मेमोरियल डिग्री कालेज, अम्बेडकरनगर, के एम0ए0 (समाजशास्त्र) की छात्रा श्रेया यादव को, प्रो. एम. पी. दुबे पर्यावरण/गांधी चिन्तन एवं शान्ति अध्ययन उत्कृष्टता स्वर्ण पदक अध्ययन केन्द्र सरदार पटेल स्मारक महाविद्यालय, अम्बेडकरनगर के बी0ए0 की छात्रा रूपाली वर्मा को, प्रो. एम. पी. दुबे दिव्यांग मेधा स्वर्ण पदक अध्ययन केन्द्र कुमार परमार्थ बाबा गोविन्द महाविद्यालय, मऊ के एम0ए0 (समाजकार्य) के छात्र सुनील कुमार को, महान राष्ट्रकवि श्रद्धेय पं0 सोहन लाल द्विवेदी स्मृति स्वर्ण पदक अध्ययन केन्द्र श्री गोवर्धन महिला महाविद्यालय, मऊ के एम0ए0 (हिन्दी) के छात्र जयराम कुमार को, स्वर्गीय प्रो. सुशील प्रकाश गुप्ता स्मृति स्वर्ण पदक अध्ययन केन्द्र, जी0एस0ए0 कालेज आफ एजूकेशन, आगरा के एम0ए0 (शिक्षाशास्त्र) की छात्रा कु0 दीपिका राठौर को, श्री संतोष कुमार दीक्षित स्मृति स्वर्ण पदक महिला वर्ग में अध्ययन केन्द्र विश्वविद्यालय मुख्य परिसर, प्रयागराज के एम0कॉम की छात्रा रिदम पाण्डेय को, स्व0 श्रीमती चारूल पाण्डेय स्मृति स्वर्ण पदक अध्ययन केन्द्र रघुनाथ गर्ल्स पी0जी0 कालेज, मेरठ, के एम0एस0सी0 (फूड एण्ड न्यूट्रीशन) की छात्रा तान्या त्यागी को तथा स्व0 डॉ0 मुरलीधर तिवारी स्मृति स्वर्णपदक अध्ययन केन्द्र देव इन्द्रावती महाविद्यालय अम्बेडकरनगर के बी0एस0सी0 की छात्रा रम्या सिंह को प्रदान किया गया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने दीक्षान्त समारोह के पूर्व विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गांवों के प्राथमिक/जूनियर विद्यालयों में आयोजित भाषण, चित्रकला एवं कहानी कथन प्रतियोगिता के विजेताओं क्रमशः आराध्या साहू, परी सिंह एवं सोनम विश्वकर्मा को पुरस्कार प्रदान किया।
दीक्षान्त समारोह में फतेहपुर, प्रतापगढ़ तथा प्रयागराज के आंगनबाड़ी केंद्रों को विश्वविद्यालय की तरफ से कुलाधिपति के द्वारा 500 किट भेंट किये गये। दीक्षान्त समारोह में छात्राओं के समूह ने मनोहारी राजस्थानी लोकनृत्य प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों द्वारा पर्यावरण संरक्षण संबंधी गायन सह-अभिनय की प्रस्तुति की कुलाधिपति ने सराहना की। इस अवसर पर राज्यपाल ने इन्दुभूषण पाण्डेय कृत पुस्तक माँ और बेटी: उड़ान से पहले की छाँव का विमोचन किया। समारोह के दौरान गोद लिये गये गाँवों में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों की डाक्यूमेन्ट्री की प्रस्तुति की गयी। कुलाधिपति द्वारा विश्वविद्यालय के उत्कृष्ट शिक्षक प्रो0 अजेन्द्र कुमार मलिक को पुरस्कृत किया गया। समारोह का संचालन प्रो0 पी0के0 पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी, प्रो0 राजेन्द्र सिंह रज्जू भय्या विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 अखिलेश कुमार सिंह, सनातनी किन्नर अखाडे़ की महामंडलेश्वर टीना माँ, एन0सी0जेड0सी0सी0 के निदेशक सुदेश शर्मा, कल्पना सहाय, उपेन्द्र सिंह, डॉ0 पी0पी0 दुबे, डॉ0 जी0एस0 शुक्ला, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी आदि प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र
जनसंपर्क अधिकारी

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