दुर्ग : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्यवाही से जुड़ी अखबार की खबर वॉट्सऐप स्टेटस पर साझा करने को लेकर एक युवक को कथित रूप से गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। पाटन पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस को दी शिकायत के अनुसार पाटन क्षेत्र के रूही गांव निवासी परमेश्वर सिंगौर ने तीन सितंबर को एक अखबार में प्रकाशित ईडी की कारर्वाई से संबंधित खबर की कटिंग अपने वॉट्सऐप स्टेटस पर लगाई थी। स्टेटस में खबर के नीचे उन्होंने जामगांव एम लिखा था। खबर में ईडी मामले में सामने आए अनिल चंद्राकर को करीब 2 करोड़ 80 लाख रुपए दिए जाने का उल्लेख था।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने खबर केवल उत्सुकतावश स्टेटस पर लगाई थी। वह अखबार में उल्लेखित किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते और उनका किसी से कोई विवाद भी नहीं है। परमेश्वर के मुताबिक चार सितंबर को दोपहर करीब 1.40 बजे उनके मोबाइल पर एक नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले ने अपना नाम अनिल चंद्राकर बताया और कथित तौर पर गाली-गलौज करते हुए धमकी दी कि‘मारते-मारते थाने ले जाऊंगा 6 महीने के लिए जेल में डलवा दूंगा।
‘परमेश्वर का आरोप है कि उन्होंने समझाने का प्रयास किया कि खबर किसी को अपमानित करने के उद्देश्य से साझा नहीं की गई थी लेकिन इसके बावजूद गाली-गलौज जारी रही। शिकायत में कहा गया है कि फोन पर बातचीत के दौरान परमेश्वर ने अपने दोस्त भोला राम सिंगौर के मोबाइल से पूरी बातचीत रिकॉडर् कराई। उन्होंने उक्त रिकॉर्डिंग पेन ड्राइव में पुलिस को सौंपने के साथ अखबार में प्रकाशित खबर की प्रति भी उपलब्ध कराई है।
परमेश्वर के अनुसार उसी दिन करीब 3.10 बजे गांव के हितेंद्र पटेल ने उन्हें फोन कर बताया कि अनिल गांव आए हैं और उन्हें बुला रहे हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस दौरान यह भी कहा गया कि‘आज तुम्हें जान से मार देंगे। ‘इसके बाद जान का खतरा महसूस होने पर परमेश्वर गांव छोड़कर चले गए।
उन्होंने पुलिस से अपनी सुरक्षा को लेकर भी आशंका जताई है। इस मामले में महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ईडी की जांच में सामने आए अनिल चंद्राकर और शिकायत में धमकी देने का आरोप जिस जामगांव एम के किराना दुकान संचालक अनिल चंद्राकर पर लगाया गया है दोनों अलग-अलग व्यक्ति हैं। समान नाम होने के कारण भ्रम की स्थिति बनी।
शिकायत में आरोपी बनाए गए अनिल चंद्राकर ने ईडी मामले से अपना कोई संबंध नहीं बताया है। परमेश्वर ने भी पुलिस को बताया कि ईडी के जिस मामले की खबर उन्होंने साझा की उससे उनका कोई संबंध नहीं है। वह न तो प्रकरण के गवाह हैं और न ही किसी जांच का हिस्सा हैं। ईडी के अनुसार सीजीपीएससी-2021 परीक्षा का पेपर लीक कर कुछ अभ्यर्थियों और आरोपियों के रिश्तेदारों तक पहुंचाया गया था तथा इसके एवज में अभ्यर्थियों से रकम ली गई।
जांच एजेंसी के मुताबिक मामले में डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे पदों पर गलत तरीके से चयन कराने की कोशिश का भी पता चला है। ईडी के अनुसार उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों को पेपर उपलब्ध कराने का भरोसा देकर 3 करोड़ रुपए से ज्यादा नकद लिए थे।



















