बैकुंठ धाम आश्रम में संस्कृत दिवस समारोह मनाया गया

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प्रयागराजlश्रीमद् आर्यावर्त विद्वत् परिषद् एवं प्रयाग विद्वत् परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में तथा जगद्गुरु रामानुजाचार्य प्रयाग पीठाधीश्वर स्वामी श्रीधराचार्य जी महाराज के पावन सान्निध्य में वैकुण्ठ धाम आश्रम अलोपीबाग प्रयागराज के सभागार में संस्कृत दिवस समारोह मनाया गया। इस अवसर पर एक विद्वत् संगोष्ठी आयोजित की गयी। संगोष्ठी की अध्यक्षता विद्वत् परिषद् के अध्यक्ष महामहोपाध्याय डाक्टर रामजी मिश्र ने की। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि थे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के व्याकरण विभागाध्यक्ष प्रोफेसर भगवत शरण शुक्ल। संगोष्ठी में संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान ब्रह्मर्षि राधेश्याम पाण्डेय त्रिफला को शाल,पटुका तथा श्रीफल प्रदान कर उनका सारस्वत सम्मान करते हुए उन्हें अभिनन्दन पत्र भेंट किया गया। संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्रीधराचार्य जी महाराज ने कहा कि संस्कृत संस्कारों की भाषा है। इसमें सारा ज्ञान विज्ञान निहित है। उन्होंने लोगों को संस्कृत के अध्ययन के लिए उत्साहित किया। प्रो भगवत शरण शुक्ल ने कहा कि संस्कृत के अध्ययन के बिना व्यक्ति अपूर्ण है। संस्कृत का ज्ञान अथाह है। स्वामी चक्रधराचार्य ने संस्कृत ग्रन्थों का उल्लेख करते हुए संस्कृत के लालित्य पर प्रकाश डाला। अध्यक्षीय भाषण में डाक्टर रामजी मिश्र ने कहा कि संस्कृत वांग्मय इतना विशाल और अथाह है कि उसके अध्ययन के लिए एक जन्म पर्याप्त नहीं है। भारत की प्रतिष्ठा भारतीय संस्कृति और संस्कृत विद्या से ही है। संगोष्ठी में देवी प्रसाद पाण्डेय ने अपना काव्यपाठ प्रस्तुत किया। ब्रह्मर्षि राधेश्याम पाण्डेय त्रिफला ने अभिनन्दन के लिए विद्वत परिषद का आभार प्रकट किया। संगोष्ठी का संचालन श्रीमती जया मिश्रा ने किया। संगोष्ठी में नगर के प्रतिष्ठित विद्वान, साहित्यकार, गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।