Shahar Samta News
कानपुर। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के इस वक्तव्य हर लड़की को खाना बनाना आना चाहिए और एक विशेषज्ञ माँ बनने का प्रयास करना चाहिए । सार्वजनिक चर्चा के बीच घर आई नन्ही परी फाउंडेशन की संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. एभा पटेल ने उनके विचारों का दृढ़ समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इस संदेश को महिलाओं की सीमाओं के रूप में नहीं, बल्कि जीवन-कौशल, मातृत्व, संस्कार और आत्मनिर्भरता के व्यापक संदर्भ में समझा जाना चाहिए।
डॉ. एभा पटेल ने कहा कि किसी भी महिला की पहचान केवल उसके पेशे या केवल उसकी पारिवारिक भूमिका से नहीं होती। एक महिला एक साथ शिक्षित, आत्मनिर्भर, सफल पेशेवर, सामाजिक नेतृत्वकर्ता और यदि वह चाहे तो एक संवेदनशील एवं सक्षम माँ भी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि मैं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल जी के इस विचार का पूर्ण समर्थन करती हूँ। खाना बनाना किसी महिला को सीमित करना नहीं, बल्कि उसे जीवन के लिए सक्षम बनाना है। यह कौशल केवल महिलाओं के लिए नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के लिए उपयोगी है। उसी प्रकार ‘विशेषज्ञ माँ’ बनने का संदेश महिलाओं को घर तक सीमित करने का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर संस्कार, शिक्षा और मानवीय मूल्य देने का संदेश है।
डॉ. पटेल ने कहा कि आज कुछ लोग नारीवाद को केवल विरोध के चश्मे से देखने लगे हैं, जबकि वास्तविक नारीवाद महिलाओं के अधिकार, सम्मान और विकल्प की बात करता है।
यदि एक महिला अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनना चाहती है, उसका सम्मान होना चाहिए। यदि वह सेना में जाना चाहती है, उसका सम्मान होना चाहिए। यदि वह उद्यमी बनना चाहती है, उसका सम्मान होना चाहिए। और यदि वह एक उत्कृष्ट माँ बनने का निर्णय लेती है, तो उसका सम्मान भी उतनी ही गरिमा के साथ होना चाहिए। किसी भी सम्मानजनक भूमिका को छोटा साबित करना महिला सशक्तिकरण नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास में अनेक महान माताओं ने राष्ट्र निर्माण में अमिट योगदान दिया है।
राजमाता जिजाबाई ने छत्रपति शिवाजी महाराज में स्वाभिमान और नेतृत्व के संस्कार दिए। पुतलीबाई ने महात्मा गांधी के जीवन में सत्य और नैतिकता की नींव रखी। भुवनेश्वरी देवी ने स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व को दिशा दी। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि एक सशक्त माँ केवल परिवार ही नहीं, समाज और राष्ट्र के भविष्य को भी आकार देती है।
देश की बेटियों के नाम डॉ. एभा पटेल का संदेश “मेरी प्यारी बेटियों, बड़े सपने देखिए। डॉक्टर बनिए, इंजीनियर बनिए, वैज्ञानिक बनिए, आईएएस बनिए, सैनिक बनिए, उद्यमी बनिए, जनप्रतिनिधि बनिए। दुनिया की हर ऊँचाई छूइए। लेकिन साथ ही जीवन के वे कौशल भी सीखिए जो आपको हर परिस्थिति में आत्मनिर्भर बनाते हैं। खाना बनाना कमजोरी नहीं, जीवन जीने की कला है। अपनी माँ से केवल भोजन बनाना ही नहीं, बल्कि प्रेम, धैर्य, संवेदनशीलता, परिवार को जोड़ने की शक्ति और संस्कार भी सीखिए। यदि आप जीवन में मातृत्व चुनें, तो ऐसी माँ बनिए जो केवल बच्चों का पालन-पोषण नहीं, बल्कि उनके चरित्र, करुणा और राष्ट्रप्रेम का निर्माण करे।”
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी सार्वजनिक जीवन के व्यक्ति के दशकों के योगदान का मूल्यांकन कुछ सेकंड की वीडियो क्लिप के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
डॉ. एभा पटेल ने समाज से आग्रह किया कि महिला सशक्तिकरण को करियर बनाम परिवार की बहस तक सीमित न रखा जाए। उन्होंने कहा,”एक बेटी की सबसे बड़ी शक्ति उसके विकल्प हैं। वह जो भी बने—उसका निर्णय सम्मान के योग्य है। शिक्षा और जीवन-कौशल, आत्मनिर्भरता और संवेदनशीलता, करियर और परिवार—ये एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक विकसित और संतुलित समाज की पहचान हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि घर आई नन्ही परी फाउंडेशन का उद्देश्य प्रत्येक बेटी को शिक्षा, सम्मान, नेतृत्व और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाना है, ताकि वह अपने सपनों को भी पूरा करे और समाज के लिए प्रेरणा भी बने। “सशक्त बेटियाँ ही सशक्त माताएँ बनती हैं, और सशक्त माताएँ ही सशक्त भारत का निर्माण करती हैं।”
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल जी के विचार का मैं पूर्ण समर्थन करती हूं।
खाना बनाना कमजोरी नहीं, आत्मनिर्भरता है। मातृत्व सीमा नहीं, संस्कार और राष्ट्र निर्माण की नींव है।
बेटियों से मेरा संदेश:
डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, सैनिक, उद्यमी बनो। दुनिया की हर ऊंचाई छुओ। साथ ही जीवन के वो कौशल भी सीखो जो हर परिस्थिति में तुम्हें मजबूत बनाएं। महिला सशक्तिकरण का मतलब “करियर बनाम परिवार” नहीं है। मतलब है – विकल्प और सम्मान।
— डॉ. एभा पटेल
संस्थापक, घर आई नन्ही परी फाउंडेशन

























