कैंसर और टिटनेस जैसी गंभीर बीमारियों का सामना कर रहे मरीजों के लिए एक चिंताजनक खबर है। National Pharmaceutical Pricing Authority ने कुछ जरुरी दवाइयों के दामों में 50% तक के इजाफे का ऐलान किया है। सरकार के इस फैसले के बाद उन लोगों की जेब पर बोझ बढ़ जाएगा जिन्हें लंबे समय तक थेरेपी या कीमोथेरेपी की जरूरत होती है।
कीमत बढ़ोतरी के पीछे की वजह
सोशल मीडिया और कुछ खबरों में यह दावा किया जा रहा है कि कीमतें मांग कम करने के लिए बढ़ाई गई हैं, जो कि पूरी तरह भ्रामक है। NPPA और उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले के पीछे की असली वजहें निम्नलिखित हैं:
- कच्चे माल (API) की बढ़ती लागत: दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) और पैकेजिंग मटेरियल के दाम वैश्विक स्तर पर काफी बढ़ गए हैं।
- उत्पादन में घाटा: पुरानी तय कीमतों पर दवा बनाना कंपनियों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा था, जिसके कारण कई कंपनियों ने उत्पादन रोक दिया था।
- दवाओं की किल्लत का खतरा: उत्पादन बंद होने से बाजार में इन जीवनरक्षक दवाओं का गंभीर संकट पैदा हो रहा था।
किन दवाओं पर पड़ेगा असर?
राहत की बात यह है कि सभी दवाओं के दाम नहीं बढ़े हैं। यह बढ़ोतरी केवल कुछ खास और बेहद जरुरी दवाओं पर लागू की गई है:
- कैंसर के शुरुआती इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ चुनिंदा दवाइयां जैसे कार्बोप्लैटिन और सिस्प्लैटिन।
- टिटनेस से बचाव के लिए प्रयोग किए जाने वाला खास इम्युनोग्लोब्युलिन इंजेक्शन।
- राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम से जुड़ी कुछ चुनिंदा वैक्सीन (जैसे BCG और खसरा/मीजल्स)।
- बढ़ी हुई दवाइयों के दाम इस प्रकार हैं-
- दवा का नाम
पुरानी कीमत
नई कीमत
अंतर / वृद्धि
कार्बोप्लैटिन इंजेक्शन (10 एमजी/एमएल)
₹60.49 प्रति एमएल
₹90.74 प्रति एमएल
+ ₹30.25
सिस्प्लैटिन इंजेक्शन (1 एमजी/एमएल)
₹7.26 प्रति एमएल
₹10.89 प्रति एमएल
+ ₹3.63
एंटी-टिटनेस इम्युनोग्लोब्युलिन (250 आईयू)
₹1,274.68 प्रति वायल
₹1,912.02 प्रति वायल
+ ₹637.34
एंटी-टिटनेस इम्युनोग्लोब्युलिन (500 आईयू)
₹1,920.79 प्रति वायल
₹2,881.19 प्रति वायल
+ ₹960.40























