सुप्रीम कोर्ट सुनवाई में बाधा मामला: दिल्ली कोर्ट ने दो लॉ स्टूडेंट्स को दी ज़मानत

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पटियाला हाउस कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान गाली-गलौज करने, कागज़ फेंकने और सुरक्षाकर्मी के साथ मारपीट करने के आरोपी दो लॉ स्टूडेंट्स को ज़मानत दे दी है। बता दें कि दिल्ली पुलिस ने लॉ स्टूडेंट्स प्रबल प्रताप सिंह और चंद्र भान को गिरफ्तार किया था। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC) रवि ने 27 जुलाई को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और ज़मानत याचिकाओं पर विचार करने के बाद प्रबल प्रताप सिंह और चंद्र भान को ज़मानत दे दी।

वहीं JMFC ने 27 जुलाई को आदेश दिया, ऊपर की गई चर्चा को देखते हुए, दोनों ज़मानत याचिकाएं मंज़ूर की जाती हैं। आरोपी प्रबल प्रताप और आरोपी चंद्रभान को रेगुलर ज़मानत पर रिहा करने का निर्देश दिया जाता है, बशर्ते वे संबंधित कोर्ट/ड्यूटी मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के लिए 25,000 रुपये का पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही राशि की एक ज़मानत (श्योरिटी) जमा करें।

कोर्ट ने यह शर्त भी लगाई है कि ज़रूरत पड़ने पर आरोपी जांच/ट्रायल में शामिल होंगे। आरोपी सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे और न ही शिकायतकर्ता या किसी अभियोजन गवाह को प्रभावित करने या उनसे संपर्क करने की कोशिश करेंगे।

आरोपियों के वकील ने दलील दी कि दोनों आरोपी युवा छात्र हैं और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है यह घटना देश की सर्वोच्च अदालत के सामने बिना किसी वकील के पेश होने के दौरान अत्यधिक भावनात्मक आवेश में हुई थी, न कि किसी सोची-समझी साज़िश के तहत जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस रिपोर्ट में भी कहा गया है कि दोनों आरोपियों में से किसी के भी मामले में आगे कोई जांच या रिकवरी बाकी नहीं है। वकील ने यह भी कहा कि जिन अपराधों का आरोप है, वे गंभीर प्रकृति के नहीं हैं और उनमें अधिकतम सज़ा दो साल से ज़्यादा नहीं है और उन्हें जेल में रखने से जांच के मकसद में कोई मदद नहीं मिलेगी।

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