प्रवेश में सीटों की कटौतीऔर फीसवृद्धि के संदर्भ मेंऑक्टा अध्यक्ष ने कुलपति को पत्र लिखा,इलाहाबाद विश्वविद्यालय में स्नातक और परास्नातक कक्षाओं में इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा सीटों की कटौती के संदर्भ में,

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इलाहाबाद विश्विविद्यालय संघटक महाविद्यालय शिक्षक संघ (आक्टा) के अध्यक्ष प्रोफेसर सुरेंद्र पाल सिंह ने विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव को पत्र लिखा है।
प्रो सिंह ने पत्र में लिखा है कि पिछले तीन सत्रों से विश्वविद्यालय में प्रवेश की सीटें को लगातार घटाया जा रहा है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में बिना सामान्य वर्ग की सीटों को कम किये पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। उसी के तहत विश्वविद्यालय में 54% सीट बढ़ाई गई थी,और लगभग डेढ़ गुना शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के पदों में वृद्धि की गई थी। आधारभूत संसाधन भी बढ़ाए गए थे और इलाहाबाद विश्वविद्यालय को इसके लिए बड़ी धनराशि मिली थी। इसके बाद सीटों में कटौती करना सामान्य, ओबीसी, एससी और एसटी, सभी वर्गों के विद्यार्थियों के अवसरों को घटाता है। प्रोफेसर सिंह ने कहा कि यह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना है और विश्वविद्यालय द्वारा 54% सीट वृद्धि किए जाने के हलफनामे के विरुद्ध है। प्रोफेसर सिंह ने कहा है कि 2024- 25 के सत्र से विश्वविद्यालय में स्नातक और परास्नातक की कुल सीटें ,जोकि 26000 से अधिक थी, घटकर 18000 के लगभग रह गई हैं।
ऑक्टा अध्यक्ष ने पत्र में लिखा है कि पिछले तीन चार सत्रों से फीस में कई गुना वृद्धि की गई, जिससे सामान्य और निम्न आय वर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ रहा है इससे छात्र और अभिभावक दुखी हैं। पत्र में कुलपति से प्रवेश की सीटों की कटौती करने और विभिन्न पाठ्यक्रमों में फीस की अतिशय बढ़ोतरी के संदर्भ में सहानुभूति पूर्वक विचार करने की मांग की गई है।

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