राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में आरोपियों के अधिवक्ता ने पुलिस पर भारतीय न्याय संहिता की गलत धाराओं के तहत जांच करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह जल्द ही अदालत में याचिका दायर कर पुलिस को उपयुक्त धाराओं के तहत जांच करने और उसी के अनुरूप आरोपपत्र दाखिल करने का निर्देश देने का अनुरोध करेंगे। फैजाबाद बार एसोसिएशन द्वारा इस मामले में आरोपियों की पैरवी नहीं करने का निर्णय लिए जाने के बाद राज्य सरकार की ओर से विधिक सहायता के लिए नियुक्त अधिवक्ता कुलशेखर सिंह ने कहा कि वह पुलिस द्वारा लगाई गई कई धाराओं को न्यायालय में चुनौती देंगे।
सिंह ने एक न्यूज एजेंसी से कहा कि मैं शीघ्र ही अदालत का दरवाजा खटखटाऊंगा और यह आग्रह करूंगा कि पुलिस इस मामले की जांच सही धाराओं के तहत करे तथा उसी के अनुरूप आरोपपत्र दाखिल किया जाए। उन्होंने दलील दी कि पुलिस ने एक ही मामले में चोरी और आपराधिक विश्वासघात या गबन से संबंधित धाराएं एक साथ लगाई हैं, जबकि उनके अनुसार दोनों प्रावधान एक साथ लागू नहीं किए जा सकते। सिंह ने कहा कि पुलिस ने चोरी और गबन दोनों की धाराएं लगाई हैं। ये दोनों धाराएं एक साथ नहीं लग सकतीं। इसके अलावा एक ऐसी धारा भी लगाई गई है, जिसमें आजीवन कारावास का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि आरोपियों का यह पहला आपराधिक मामला है और आजीवन कारावास का प्रावधान वाली धारा इस मामले में अनुचित ढंग से लगाई गई है।अधिवक्ता ने पुलिस द्वारा आरोपियों को लोक सेवक मानने और उन पर सार्वजनिक संपत्ति के गबन का आरोप लगाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि राम मंदिर न्यास कोई लोक प्राधिकरण नहीं है, इसलिए आरोपियों को लोक सेवक नहीं माना जा सकता। यदि उचित धाराएं लगाई गई होतीं तो मेरे मुवक्किलों को स्थानीय अदालत से जमानत मिल सकती थी। जमानत याचिका दाखिल करने के संबंध में पूछे जाने पर सिंह ने कहा कि वह अगले सप्ताह इस प्रक्रिया पर काम शुरू करेंगे, हालांकि उन्होंने याचिका दायर करने की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने पहले एक प्रस्ताव पारित कर अपने सदस्यों से राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के आरोपियों की पैरवी नहीं करने का निर्णय लिया था।

























