बंगाल में धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने का मामला पहुंचा कलकत्ता हाई कोर्ट, 13 अगस्त को सुनवाई

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल में धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकर हटाने के पुलिस के कथित आदेश का मामला अब कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंच गया है। सोमवार को इस संबंध में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई। याचिका में हुगली समेत राज्य के विभिन्न जिलों में मस्जिदों, मंदिरों और अन्य पूजा स्थलों को लाउडस्पीकर हटाने के लिए दिए गए कथित मौखिक आदेशों को चुनौती दी गई है।

हाई कोर्ट से तत्काल सुनवाई की मांग-वरिष्ठ वकील कल्याण बंद्योपाध्याय ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तापब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति अतारूप बनर्जी की खंडपीठ के समक्ष याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की। अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए 13 अगस्त की तारीख तय की है। याचिका दायर करने वाले वकील दानिश फारूकी के अनुसार, राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पुलिस अधिकारियों की ओर से धार्मिक स्थलों के प्रबंधन को लाउडस्पीकर हटाने के लिए कहा गया है। याचिका में दावा किया गया है कि इन निर्देशों के लिए कोई लिखित आदेश, अधिसूचना या स्पष्ट कानूनी आधार नहीं दिया गया।

‘बिना डेसिबल स्तर की जांच के दिए जा रहे आदेश-IL में आरोप लगाया गया है कि पुलिस अधिकारी यह जांच किए बिना धार्मिक संस्थानों पर लाउडस्पीकर हटाने का दबाव बना रहे हैं कि उनसे निकलने वाली आवाज का डेसिबल स्तर निर्धारित ध्वनि प्रदूषण नियमों का उल्लंघन करता है या नहीं। याचिका में ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 का हवाला देते हुए कहा गया है कि लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर मौजूदा कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि किसी धार्मिक स्थल पर इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर से ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का उल्लंघन नहीं हो रहा है, तो केवल मौखिक आदेश के आधार पर उसे हटाने का निर्देश नहीं दिया जाना चाहिए।

अजान को लेकर संविधान का हवाला

याचिकाकर्ता दानिश फारूकी ने PIL में अजान को इस्लामिक आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला दिया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि धार्मिक आस्था से जुड़े इस अभ्यास पर पूरी तरह रोक लगाना मौलिक अधिकारों से जुड़ा सवाल खड़ा करता है। हालांकि, याचिका में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को ध्वनि प्रदूषण से जुड़े मौजूदा नियमों के अधीन रखने की मांग की गई है। PIL में पुलिस की कथित कार्रवाई को मनमाना बताते हुए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और कानून के शासन का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत से इन कथित मौखिक आदेशों को रद्द करने और धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को मौजूदा ध्वनि प्रदूषण नियमों के अनुसार अनुमति देने का अनुरोध किया है।

13 अगस्त को होगी सुनवाई

फिलहाल इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट की सुनवाई का इंतजार है। अदालत 13 अगस्त को PIL पर सुनवाई करेगी। ऐसे में अब नजर इस बात पर होगी कि हाई कोर्ट पुलिस के कथित मौखिक आदेशों और धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल से जुड़े इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है।

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