हरियाणा में पहली बार हड़ताल से पहले ही बनी बात, अनिल विज ने छह घंटे में बातचीत से टाला बिजली संकट

0
5

चंडीगढ़ :  हरियाणा के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियर्स की 11 से 13 अगस्त तक प्रस्तावित हड़ताल शुरू होने से पहले ही स्थगित हो गई। हरियाणा के इतिहास में इसे एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले बिजली कर्मचारी संगठनों की ओर से हड़ताल का आह्वान किए जाने के बाद उसे वापस लेने के उदाहरण बेहद कम रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम का श्रेय प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अनिल विज के संवाद, धैर्य, प्रशासनिक कौशल और सहनशीलता को दिया जा रहा है।

लगभग छह घंटे तक चली मैराथन बैठक में बिजली विभाग के प्रशासनिक स्तर के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान कर्मचारी संगठनों की मांगों और उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना गया तथा विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। लंबे विचार-विमर्श के बाद ऐसा रास्ता निकाला गया, जिससे प्रस्तावित हड़ताल को टालना संभव हो सका।

टकराव के बजाय संवाद को बनाया समाधान का रास्ता
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बातचीत के दौरान जल्दबाजी या टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय शांति और धैर्य के साथ कर्मचारी संगठनों की बात सुनी। बिजली जैसे आवश्यक सेवा से जुड़े विभाग में किसी भी प्रकार की हड़ताल का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। ऐसे में हड़ताल शुरू होने से पहले ही स्थिति को संभाल लेना सरकार और जनता दोनों के हित में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विज ने बैठक में कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद को प्राथमिकता दी। उन्होंने समस्याओं को केवल प्रशासनिक विषय मानने के बजाय कर्मचारियों की व्यावहारिक चिंताओं के रूप में समझने का प्रयास किया। यही कारण रहा कि लंबी बैठक के बाद समाधान की दिशा में सहमति का रास्ता तैयार हुआ।

हरियाणा के राजनीतिक और प्रशासनिक इतिहास में अलग घटनाक्रम
हरियाणा के गठन के बाद बिजली विभाग से जुड़े कर्मचारी संगठनों की ओर से कई बार आंदोलन और हड़ताल का रास्ता अपनाया गया है। अतीत में जब भी बिजली संगठनों ने हड़ताल का आह्वान किया, तो सामान्य तौर पर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच वार्ता हड़ताल के बाद ही आगे बढ़ती रही।

इस बार स्थिति इसके ठीक विपरीत रही। हड़ताल की तारीख आने से पहले ही सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत हुई और हड़ताल स्थगित करने पर सहमति बनी। यही पहल अनिल विज की कार्यशैली को अलग पहचान देती है।
इसे केवल एक हड़ताल टलने की घटना के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच संवाद की एक नई कार्यसंस्कृति के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।

तीन महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी, चुनौती भी बड़ी
अनिल विज के पास इस समय ऊर्जा के साथ परिवहन और श्रम जैसे महत्वपूर्ण विभाग भी हैं। इन तीनों विभागों का सीधा संबंध प्रदेश के कर्मचारियों और आम जनता से है। बिजली, परिवहन और श्रम विभाग से जुड़े निर्णयों का असर प्रदेश के करोड़ों लोगों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पड़ता है।

विशेष रूप से बिजली विभाग में कर्मचारियों और इंजीनियर्स के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखना किसी भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। बिजली व्यवस्था चौबीसों घंटे चलने वाली आवश्यक सेवा है। इसलिए कर्मचारी संगठनों के साथ संवाद और उनकी समस्याओं का समय रहते समाधान प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

पांच बिजली यूनियनों का संयुक्त मोर्चा, फिर भी बनी सहमति
इस बार आंदोलन का स्वरूप भी व्यापक था। हरियाणा में बिजली क्षेत्र से जुड़ी पांच प्रमुख यूनियनों के साथ हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा तथा डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन भी इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े रहे।

इतने व्यापक कर्मचारी प्रतिनिधित्व के बावजूद बातचीत के जरिए हड़ताल को स्थगित करवाना आसान काम नहीं था। इसके लिए सरकार की ओर से लगातार संवाद, धैर्य और सभी पक्षों को साथ लेकर चलने की क्षमता की आवश्यकता थी। छह घंटे तक चली बैठक इसी गंभीर प्रयास का परिणाम मानी जा रही है।

जनता को राहत, बिजली व्यवस्था पर नहीं पड़ा आंदोलन का असर
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से सबसे अधिक प्रभावित आम उपभोक्ता होते। घरेलू उपभोक्ताओं से लेकर उद्योग, व्यापार और कृषि क्षेत्र तक बिजली व्यवस्था पर निर्भर हैं। ऐसे में 11 से 13 अगस्त तक प्रस्तावित हड़ताल का टलना प्रदेश की जनता के लिए भी बड़ी राहत है।
सरकार के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिजली व्यवस्था में किसी भी प्रकार का व्यवधान केवल विभागीय विषय नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा असर जनजीवन और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है।

अनिल विज की कार्यशैली की परीक्षा में संवाद की जीत
अनिल विज लंबे समय से अपनी स्पष्टवादिता और प्रशासनिक सख्ती के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस घटनाक्रम में उनकी दूसरी प्रशासनिक शैली भी सामने आई—संकट के समय संयम और संवाद।
छह घंटे की बैठक में लगातार बातचीत करते हुए समाधान तक पहुंचना यह बताता है कि हर मुद्दे का समाधान केवल सख्ती से नहीं, बल्कि धैर्य और बातचीत से भी निकाला जा सकता है। विज ने इस बार कर्मचारी संगठनों को आमने-सामने बैठाकर उस स्थिति को बनने से पहले ही रोक दिया, जिसका असर सीधे आम जनता पर पड़ सकता था।

हड़ताल रोकना ही नहीं, भरोसा कायम रखना भी चुनौती
अब असली चुनौती यह रहेगी कि बैठक में बनी सहमति को जमीन पर किस तरह आगे बढ़ाया जाता है। कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच संवाद का यह सिलसिला जारी रहता है तो भविष्य में भी कई विवादों को आंदोलन का रूप लेने से पहले ही सुलझाया जा सकता है।

फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि बिजली कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल का शुरू होने से पहले स्थगित होना हरियाणा के प्रशासनिक इतिहास में एक अलग घटनाक्रम है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने जिस तरह करीब छह घंटे तक धैर्यपूर्वक बातचीत के जरिए समाधान का रास्ता निकाला, उसने सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच संवाद की राजनीति को मजबूती दी है।
हड़ताल सड़क पर उतरने से पहले ही बातचीत की मेज पर रुक गई—और इस घटनाक्रम में अनिल विज की भूमिका सबसे अहम रही।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here