ऑपरेशन सिंदूर के शहीद को नहीं मिला पूरा सम्मान! शहीद दिनेश के परिवार का छलका दर्द,  स्वतंत्रता दिवस का सम्मान भी लौटाया था

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पलवल: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 7 मई 2025 को देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए गांव गुलावत के नंगला मोहम्मदपुर निवासी सैनिक दिनेश शर्मा की शहादत को लेकर अब उनके परिवार की पीड़ा सामने आई है। शहीद की अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित मंत्री, विधायक, विभिन्न दलों के नेता और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे थे। उस दौरान मुख्यमंत्री ने गांव और परिवार की मांग पर कई घोषणाएं की थीं। परिवार का आरोप है कि एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद करीब 80 प्रतिशत घोषणाएं पूरी नहीं हुई हैं।


मुख्यमंत्री की घोषणाओं में गांव का नाम शहीद दिनेश पुर रखने, स्कूल का नाम शहीद के नाम पर करने, गांव के दोनों प्रवेश द्वारों पर ‘ऑपरेशन सिंदूर शहीद दिनेश द्वार’ बनाने तथा शहीद के नाम पर स्मारक और पार्क बनाने की घोषणा शामिल थी। परिवार के अनुसार स्कूल का नाम बदलने के अलावा अधिकांश घोषणाएं आज भी अधूरी हैं। जिसके कारण 15 स्वतंत्रता दिवश पर सरकार की ओर से दिए जाने वाले शहीद परिवार सम्मान को भी लौटा था। 

नाराजगी का कारण-पहली पुण्यतिथि पर भी नहीं पहुंचे नेता-अधिकारी
परिवार की नाराजगी 7 मई 2026 को शहीद की पहली पुण्यतिथि पर और गहरी हो गई। परिवार के अनुसार प्रतिमा अनावरण एवं शहीद सम्मान समारोह में निमंत्रण के बावजूद कोई प्रमुख नेता या प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा। परिवार ने इसे शहीद का अपमान बताते हुए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी जताई।

इसी के चलते परिवार ने 15 अगस्त के उपमंडल स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने का निमंत्रण ठुकरा दिया। इतना ही नहीं, शहीद परिवार को सम्मानित करने के लिए तहसील कार्यालय से पहुंचे शॉल और उपहार भी परिवार ने वापस कर दिए।

हीद के पिता दयाचंद शर्मा, पत्नी सीमा शर्मा और भाइयों पुष्पेंद्र शर्मा व विष्णु शर्मा का कहना है कि उन्हें औपचारिक सम्मान नहीं, बल्कि शहीद को  वास्तविक सम्मान चाहिए। परिवार ने आरोप लगाया कि गांव के सरपंच की कथित राजनीति के कारण मुख्यमंत्री की घोषणाएं पूरी नहीं हो पा रही हैं और सरपंच परिवार के कारण गांव में रंजिश का माहौल बना हुआ है। परिवार का कहना है कि अब उन्हें गांव में डर लगने लगा है। उन्होंने सरकार से कहा कि यदि शहीद को सम्मान और परिवार को सुरक्षा नहीं दी जा सकती तो उन्हें गांव छोड़ने की अनुमति दे दी जाए।परिवार के अनुसार शहीद स्मारक और पार्क की घोषणा के बावजूद मौके पर केवल एक छोटा कमरा और अधूरी प्रतिमा लगाई गई है। परिवार का दावा है कि प्रतिमा पर करीब 1.90 लाख रुपये खर्च हुए, जिसकी राशि प्रशासन द्वारा अभी तक वापस नहीं की गई है।

शहीद परिवार का कहना है कि “हमें शॉल और उपहार नहीं चाहिए, हमें अपने शहीद का सम्मान चाहिए।” परिवार ने मुख्यमंत्री और प्रशासन से सभी घोषणाओं को जल्द पूरा करने तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।अब सवाल यह है कि जिस शहीद की अंतिम यात्रा में हजारों लोग उमड़े और सरकार ने सम्मान के साथ कई घोषणाएं कीं, क्या उसकी पहली पुण्यतिथि के बाद उठी परिवार की पीड़ा पर सरकार गंभीरता से कार्रवाई करेगी?

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