महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चलाने वाले व्यावसायिक चालकों के लिए अब व्यावहारिक मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य कर दिया गया है। परिवहन विभाग ने इस नियम को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए पूरे राज्य में विशेष जांच अभियान शुरू किया है। विभाग के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य चालकों और यात्रियों के बीच संवाद को बेहतर और सुगम बनाना है। अभियान के शुरुआती चरण में राज्यभर में 8,217 ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों की जांच की गई। इनमें से 1,268 चालक ऐसे पाए गए जिन्हें दैनिक कामकाज के स्तर की व्यावहारिक मराठी का पर्याप्त ज्ञान नहीं था। इन सभी चालकों को परिवहन विभाग की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं।
3,995 चालकों की जांच
मुंबई महानगर क्षेत्र में परिवहन विभाग की टीमों ने व्यापक चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान कुल 3,995 चालकों की जांच की गई। इनमें से 604 चालक ऐसे पाए गए जो दैनिक कामकाज के लिए आवश्यक स्तर की व्यावहारिक मराठी नहीं जानते थे। विभाग ने इन सभी चालकों को नोटिस जारी किया है।
अन्य जिलों में 664 चालकों को नोटिस
MMR को छोड़कर महाराष्ट्र के अन्य जिलों में भी परिवहन विभाग ने जांच अभियान चलाया। यहां 4,222 चालकों की जांच की गई, जिनमें से 664 चालकों को व्यावहारिक मराठी का पर्याप्त ज्ञान नहीं होने के कारण नोटिस दिया गया।
यात्रियों से संवाद बेहतर करने पर जोर
परिवहन विभाग का कहना है कि ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालक रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों के संपर्क में रहते हैं। ऐसे में यात्रियों के साथ बुनियादी और प्रभावी संवाद के लिए व्यावहारिक मराठी का ज्ञान उपयोगी माना गया है। विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य नियम के अनुपालन के साथ-साथ चालक और यात्री के बीच संवाद को आसान बनाना है।
विशेष जांच अभियान के दौरान सामने आए आंकड़ों से स्पष्ट है कि परिवहन विभाग अब इस नियम के पालन को लेकर पूरे राज्य में निगरानी बढ़ा रहा है।




















