मुंबई: कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख एंव राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने ‘मराठी भाषा प्रवीणता अभियान’ के बीच, सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि “विवाद से न देश चलता है और न ही सरकार चलती है। विवाद से कुछ लोगों की राजनीति चलती है। उनकी राजनीति हमेशा विवाद से ही चलती है, चलने दीजिए… ये (मराठी भाषा) मुद्दा है आज का? आज के मुद्दे महंगाई, नौकरी, बेरोजगारी, पेपर लीक, पैलेट गन, महिला सुरक्षा, अर्थव्यवस्था की हालत और बंद होते उद्योग हैं लेकिन अगर हम इन पर चर्चा करेंगे तो इनकी सरकार हिल जाएगी। इसलिए ये क्या लाते हैं, हिंदी बोला, मराठी बोला, ये मत पहना, ये मत खाओ, चलने दीजिए। इनकी दुकान के शटर अब बंद होने वाले हैं।
राज्य में मराठी की प्राथमिकता
आप को बता दें कि महाराष्ट्र में हिंदी-मराठी भाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, सरकार ने महाराष्ट्र का हिंदी-मराठी भाषा विवाद मूल रूप से इस बात को लेकर है कि राज्य में मराठी की प्राथमिकता कितनी हो और हिंदी को स्कूलों व सरकारी/सार्वजनिक कामकाज में किस हद तक बढ़ावा या अनिवार्यता दी जाए।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
2025 में महाराष्ट्र सरकार ने प्राथमिक कक्षाओं में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में सामान्यतः पढ़ाने की नीति बनाई थी। सरकार के मुताबिक यह तीन-भाषा फॉर्मूले का हिस्सा था, लेकिन राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे समेत कई मराठी संगठनों ने इसे हिंदी थोपने की कोशिश बताया। विरोध के बाद सरकार ने संबंधित आदेश वापस ले लिया। 2026 में महाराष्ट्र में ऑटो, टैक्सी और कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा के ज्ञान से जुड़ी कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हुआ है। कई गैर-मराठी भाषी ड्राइवरों को नोटिस मिलने के बाद एक बार फिर मराठी भाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।



















