सहारनपुर: समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि भाजपा द्वारा किए गए ‘आस्था के साथ खिलवाड़’ एवं “राम धन” की चोरी को न तो भगवान माफ करेंगे और न ही जनता। सपा प्रमुख ने सहारनपुर के दौरे के दौरान संवाददाताओं से कहा,”लोग मंदिरों के बाहर बैठकर भीख मांगते हैं, लेकिन वे मंदिर से चोरी नहीं करते।” राम मंदिर चंदे में कथित अनियमितताओं से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए यादव ने कहा,”भाजपा ने आस्था और विश्वास के साथ खिलवाड़ किया है और अब ऐसे लोगों को क्लीन चिट भी मिल गई है। क्या इसका मतलब यह है कि वहां कुछ हुआ ही नहीं?
उन्होंने कहा,”लेकिन राम धन की चोरी को कोई माफ नहीं करेगा। न तो भगवान इसे माफ करेंगे और न ही जनता।” पूर्व मुख्यमंत्री ने आरक्षण के विषय पर कहा, ”आरक्षण था, आरक्षण है और आरक्षण रहेगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि जहां भाजपा आरक्षण के पक्ष में बात करती है, वहीं उसके ”अंडरग्राउंड सहयोगी” इसे खत्म करने के लिए काम कर रहे हैं। यादव ने लखनऊ-कानपुर और गंगा एक्सप्रेसवे पर बार-बार होने वाले धंसाव, जलभराव और मरम्मत के काम को लेकर भी भाजपा सरकार पर हमला किया तथा कहा, ”एक्सप्रेसवे पर गहरे गड्ढे हैं। कभी-कभी वे उन्हें पंखों से सुखाते हैं और कभी-कभी कालीनों से ढक देते हैं।
उन्होंने सवाल किया कि अगर एक्सप्रेसवे के डिजाइन में खामियां थीं तो इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा? उन्होंने इस विषय पर सरकार से जवाबदेही की मांग की। यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार ने लखनऊ में कैंसर के इलाज के लिए एक विशेष संस्थान स्थापित किया था। उन्होंने वादा किया कि अगर भविष्य में जरूरत पड़ी तो सहारनपुर क्षेत्र में कैंसर से संबंधित एक प्राथमिक या माध्यमिक अनुसंधान केंद्र स्थापित किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में सहारनपुर के लिए एक विशेष घोषणापत्र तैयार किया जाएगा। इलाके में प्रस्तावित रैली के बारे में यादव ने कहा कि मौसम के कारण इसे टाल दिया गया है और अब यह चुनाव के दौरान आयोजित की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका से संबंधित प्रतिबंधों ने किसानों, निर्यातकों, कारीगरों और स्थानीय व्यवसायों को प्रभावित किया है। यादव ने यह भी आरोप लगाया कि इस इलाके में खेलों में काफी दिलचस्पी होने के बावजूद सरकार ने इस क्षेत्र को नजरअंदाज किया है। उन्होंने महंगाई और गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर भी सरकार की आलोचना की।



















