मक्का समझौता बना पाकिस्तान के लिए मुसीबत; हूतियों ने दी सीधी धमकी- यमन में दखल दिया तो अगला नंबर तुम्हारा

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मक्का समझौता बना पाकिस्तान के लिए मुसीबत; हूतियों ने दी सीधी धमकी- यमन में दखल दिया तो अगला नंबर तुम्हारा

Islamabad: सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान और तुर्की के मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की परीक्षा उस समय होती दिख रही है, जब यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर हमले तेज कर दिए हैं। इसी बीच हूती नेताओं की ओर से पाकिस्तान और तुर्की को चेतावनी दी गई है कि यदि दोनों देश यमन के संघर्ष में सैन्य रूप से उतरते हैं तो उन्हें भी निशाना बनाया जा सकता है। 7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते में कहा गया है कि तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला तीनों पर हमला माना जाएगा और तीनों देश अपनी सामूहिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करेंगे।

हूती नेता मोहम्मद अल-बुखैती ने पाकिस्तान और तुर्की को चेतावनी दी है कि अगर दोनों देश सऊदी अरब के समर्थन में यमन के संघर्ष में सीधे शामिल होते हैं तो उन पर भी हमला किया जा सकता है। हूती पक्ष का कहना है कि यमन किसी विदेशी सैन्य हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा। हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तान और तुर्की ने अब तक संयुक्त रूप से यमन में सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा नहीं की है। पाकिस्तान ने रक्षा समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जबकि तुर्की ने सऊदी अरब की जरूरत पड़ने पर सैन्य-तकनीकी सहायता देने की तैयारी जताई है। इस बीच सऊदी अरब ने पुष्टि की है कि हूतियों ने शनिवार को राजधानी रियाद की ओर एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जिसे सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने बीच रास्ते में रोक दिया। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, इस घटना में किसी के हताहत होने या नुकसान की सूचना नहीं है।हूतियों ने अलग से दावा किया कि उन्होंने रियाद में संवेदनशील ठिकानों और यनबू में सऊदी तेल कंपनी अरामको से जुड़े प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। सऊदी अधिकारियों ने यनबू के अलावा ताइफ, बैश और फरासन में भी हमले के प्रयासों को नाकाम करने की बात कही है। इस समझौते ने सऊदी अरब की सुरक्षा को पाकिस्तान और तुर्की के साथ सीधे जोड़ दिया है। समझौते के मुताबिक किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला तीनों पर हमला माना जाएगा। ऐसे में हूती हमलों के बढ़ने से यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि अगर रियाद औपचारिक सैन्य मदद मांगता है तो पाकिस्तान और तुर्की किस स्तर पर प्रतिक्रिया देते हैं।रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान ने अभी तक सीधे सैन्य हस्तक्षेप नहीं किया है। इस्लामाबाद ने कूटनीतिक रास्ते से तनाव कम करने पर भी जोर दिया है। वहीं तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा है कि सऊदी अरब को कुछ सैन्य और खासकर तकनीकी जरूरतें हो सकती हैं और उनका देश इन्हें पूरा करने में मदद के लिए तैयार है। पाकिस्तान के लिए स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि वह सऊदी अरब का रक्षा साझेदार होने के साथ ईरान के साथ भी संबंध बनाए रखना चाहता है। हूती आंदोलन को ईरान का समर्थन प्राप्त है, हालांकि तेहरान हूतियों पर प्रत्यक्ष नियंत्रण से इनकार करता रहा है। मक्का समझौते के बाद सऊदी अरब पर बढ़ते हमले पाकिस्तान की उस नीति की परीक्षा ले रहे हैं, जिसमें वह एक तरफ रियाद के साथ सुरक्षा संबंध मजबूत कर रहा है और दूसरी तरफ क्षेत्रीय तनाव को कूटनीतिक माध्यम से नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है।

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