मॉनसून :बंगाल की खाड़ी के सिस्टम और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ने घुमाया पासा, मॉनसून की विदाई से पहले बदला मौसम

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मॉनसून :बंगाल की खाड़ी के सिस्टम और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ने घुमाया पासा, मॉनसून की विदाई से पहले बदला मौसम

नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में झमाझम बारिश हुई है। पिछले एक हफ्ते में हुई इस झमाझम बारिश ने देश भर में सीज़नल बारिश के अंतर(डेफिसिट) को काफी हद तक पाट दिया है। महज सात दिनों के भीतर बारिश की कुल कमी 15% से घटकर 12% पर आ गई है। बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और उत्तर भारत से गुजर रहे वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक साथ सक्रिय होने से नमी से भरी हवाएं चलीं। इसके असर से उत्तर, मध्य, दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में सूखे के लंबे दौर के बाद व्यापक स्तर पर पानी बरसा है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के अनुसार: 28 सितंबर तक की स्थिति: 1 जून से 28 सितंबर के दौरान देश भर में औसतन 852.9 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, जिसके मुकाबले 750.3 मिमी दर्ज की गई। इससे बारिश की कुल कमी घटकर 12% रह गई।

21 सितंबर तक की स्थिति: ठीक एक हफ्ते पहले तक देश में 818.8 मिमी की सामान्य बारिश के मुकाबले केवल 697 मिमी बारिश हुई थी, जिससे कमी 15% पर बनी हुई थी।

ओडिशा में बेहतरीन स्थिति: बारिश से सबसे ज्यादा फायदा ओडिशा को मिला है। राज्य में 28 सितंबर तक सामान्य 1,378.8 मिमी के मुकाबले 1,476.8 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से 7% अधिक है।

लौटते मॉनसून का आखिरी वार
यह सुधार ऐसे समय में आया है जब दक्षिण-पश्चिम मॉनसून उत्तर-पश्चिम भारत से धीरे-धीरे अपनी वापसी (विथड्रॉल) शुरू कर चुका है। सितंबर के इस आखिरी दौर की बारिश ने पूरे सीज़न के दौरान रहे सूखे के असर को कम करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

खासकर मध्य और उत्तर भारत के उन राज्यों के लिए यह बारिश जीवनदायिनी साबित हुई है, जहाँ मॉनसून का वितरण काफी असमान था। इसके साथ ही दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के हिस्सों में भी इन मौसमी प्रणालियों के कारण अच्छी नमी और बारिश दर्ज की गई।

 ताजा बारिश ने कई राज्यों के आंकड़ों में सुधार जरूर किया है, लेकिन देश भर में बारिश का वितरण अब भी एक समान नहीं है। उत्तर-पश्चिम भारत, प्रायद्वीपीय (दक्षिण) भारत और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में अभी भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की जा रही है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मॉनसून की पूरी तरह से विदाई होने से पहले आने वाले कुछ दिनों में यह कमी और कितनी कम हो पाती है।

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