नई दिल्ली : राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि देशभर में एक साथ चुनाव कराने संबंधी विधेयकों पर विचार कर रही संसद की संयुक्त समिति छह अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों के साथ इस मुद्दे पर ”अनौपचारिक चर्चा” करने वाली है।
उन्होंने इसे ”असंवैधानिक” और शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के विपरीत बताया। सिब्बल ने कहा कि यह कदम अभूतपूर्व है और उन्होंने अपने पूरे कानूनी करियर में ऐसा उदाहरण नहीं देखा। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि जिस कानून को बाद में उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है, उसी के बारे में न्यायाधीशों को यह बताना उचित नहीं है कि कानून कितना अच्छा है।
उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”सरकार न्यायाधीशों को बता रही है कि कानून कितना अच्छा है। यही वह कानून है, जिसके खिलाफ याचिका दायर की जाएगी और उच्चतम न्यायालय तय करेगा कि याचिका वैध है या नहीं तथा कानून को रद्द किया जाना चाहिए या बरकरार रखा जाना चाहिए।” निर्दलीय राज्यसभा सदस्य ने कहा कि कानून बनाना संसद का अधिकार है और कानून की संवैधानिक वैधता की समीक्षा करना अदालत का दायित्व।




















