राफेल के सामने फिसड्डी हैं चीन के J-16 लड़ाकू विमान, मिस्र में हवाई युद्धाभ्यास ने खोली पावर पोल

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राफेल के सामने फिसड्डी हैं चीन के J-16 लड़ाकू विमान, मिस्र में हवाई युद्धाभ्यास ने खोली पावर पोल

चीन के जे-16 और फ्रांस निर्मित राफेल लड़ाकू विमानों के बीच मिस्र में हुए हवाई युद्धाभ्यास ने दोनों विमानों की क्षमताओं को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। अगस्त के दूसरे पखवाड़े से सितंबर 2026 की शुरुआत तक चले ‘ईगल्स ऑफ सिविलाइजेशन 2026’ अभ्यास में पहली बार चीनी जे-16 विमानों ने मिस्र के राफेल और मिग-29एम2 विमानों के साथ हवाई युद्ध की परिस्थितियों में प्रशिक्षण लिया। चीनी रक्षा मंत्रालय ने 23 अगस्त के अभ्यास का वीडियो भी जारी किया था, जिसमें जे-16 और राफेल के बीच मध्यम तथा नजदीकी दूरी के हवाई युद्धाभ्यास का उल्लेख किया गया। बाद में कुछ रक्षा समाचार माध्यमों ने दावा किया कि करीबी मुकाबले में राफेल की फुर्ती चीनी पायलटों के लिए विशेष रूप से प्रभावशाली रही।  


राफेल की फुर्ती क्यों है खास?
फ्रांस की कंपनी दसॉ द्वारा निर्मित राफेल दो इंजन वाला बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है। इसकी खासियत केवल गति या हथियारों की क्षमता नहीं, बल्कि उड़ान के दौरान नियंत्रण, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और अलग-अलग प्रकार के अभियानों को अंजाम देने की क्षमता भी है।

  •  डेल्टा-कैनार्ड डिजाइन: इसके पंखों और आगे लगे छोटे पंखों का संयोजन विमान को हवा में नियंत्रण और दिशा बदलने में मदद करता है।
  •  डिजिटल उड़ान नियंत्रण: इसकी कंप्यूटर आधारित प्रणाली पायलट को जटिल उड़ान परिस्थितियों में विमान पर नियंत्रण रखने में सहायता देती है।
  •  मेटेओर मिसाइल: यह दृश्य सीमा से बाहर हवा से हवा में हमला करने के लिए विकसित मिसाइल है, जो दूर हवाई लक्ष्यों के विरुद्ध राफेल की क्षमता बढ़ाती है।
  •  स्पेक्ट्रा प्रणाली: यह रडार और अन्य खतरों की पहचान, इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा तथा जवाबी कार्रवाई में सहायता करती है।
     

चीन का जे-16 भी कम ताकतवर नहीं  
चीन का शेनयांग जे-16 दो इंजन वाला भारी बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है। यह लंबी दूरी के अभियानों, विभिन्न प्रकार के हथियार ले जाने और आधुनिक सेंसरों के इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया है। इसकी प्रमुख क्षमताओं में शामिल हैं:

  • भारी हथियार और ईंधन ले जाने की क्षमता।
  • आधुनिक रडार और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल।
  • लंबी दूरी के अभियानों में अन्य विमानों और हवाई निगरानी प्रणालियों के साथ काम करने की क्षमता।

J-16 का आकार बड़ा होने के कारण उसे करीबी मुकाबले में हर परिस्थिति में राफेल से कमजोर मान लेना सही नहीं होगा। इसी तरह, राफेल की बेहतर संभावित फुर्ती का अर्थ यह भी नहीं है कि वह हर दूरी और हर युद्ध परिस्थिति में J-16 पर भारी पड़ेगा।


भारत के लिए इस अभ्यास के मायने 
भारत के पास राफेल विमानों का अपना बेड़ा है। इसलिए मिस्र में हुए अभ्यास पर भारतीय रक्षा विशेषज्ञों की नजर रहना स्वाभाविक है। इस तरह के प्रशिक्षण से चीन को फ्रांसीसी विमान की क्षमताओं और संभावित युद्ध रणनीतियों को समझने का अवसर मिलता है। दूसरी ओर, ऐसे अभ्यास आधुनिक लड़ाकू विमानों की खूबियों और सीमाओं को परखने का मौका भी देते हैं। भारत के राफेल विमानों में भारतीय जरूरतों के अनुरूप विशेष बदलाव किए गए हैं।  एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि अभ्यास में करीबी दूरी पर विमान की फुर्ती और वास्तविक युद्ध में लंबी दूरी की मिसाइलों से होने वाले मुकाबले के परिणाम अलग हो सकते हैं।

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