नई दिल्ली। नेशनल हाईवे पर सफर के दौरान कई बार टोल प्लाजा पर फास्टैग (FASTag) स्कैन न होने या सर्वर डाउन होने की वजह से अचानक पेमेंट अटक जाता है। ऐसे वक्त में ड्राइवरों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या अब उन्हें मजबूरी में दोगुना टोल टैक्स भरना पड़ेगा? स्कैनर की खराबी या तकनीकी चूक को लेकर टोल कर्मचारियों और यात्रियों के बीच आए दिन तीखी बहस देखने को मिलती है। हालांकि, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस संबंध में बेहद स्पष्ट नियम बनाए हैं, जिनसे आप बेवजह के एक्स्ट्रा चार्ज और जुर्माने से बच सकते हैं।
अगर आपकी गाड़ी का फास्टैग किसी वजह से स्कैन नहीं हो पा रहा है, तो अब आपको घबराने की जरूरत नहीं है। नए बदलावों के तहत दोगुना टैक्स लगेगा या नहीं, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आप भुगतान किस तरीके से कर रहे हैं। यदि फास्टैग रीड न होने पर आप कैश देने के बजाय गूगल पे, फोनपे, पेटीएम जैसे UPI या अन्य डिजिटल माध्यम से पेमेंट करते हैं, तो आपसे दोगुना टैक्स नहीं लिया जाएगा। ऐसी स्थिति में आपको सामान्य टोल दर का केवल 1.25 गुना (यानी सिर्फ 25 प्रतिशत अतिरिक्त) ही भुगतान करना होगा। हालांकि, यदि आप डिजिटल पेमेंट के बजाय सीधे नकद राशि (Cash) देते हैं, तो नियमानुसार आपको दोगुना टोल टैक्स चुकाना पड़ेगा। सरकार का यह नया कदम टोल प्लाजा पर डिजिटल और कैशलेस ट्रांजैक्शन को प्रोत्साहित करने के लिए उठाया गया है।
इसके अलावा, टोल प्लाजा पर बिना टैक्स चुकाए गाड़ी निकालकर ले जाना भारी पड़ सकता है। यदि कोई वाहन चालक बिना टोल दिए निकल जाता है और अगले 72 घंटों के भीतर उस बकाया राशि का भुगतान नहीं करता है, तो NHAI सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित वाहन पर दोगुना जुर्माना आयत कर सकता है।
सफर के दौरान किसी भी तरह की धोखाधड़ी या अतिरिक्त शुल्क से बचने के लिए हमेशा अपनी गाड़ी का फास्टैग एक्टिव रखें और उसमें पर्याप्त बैलेंस बनाए रखें। अगर टोल प्लाजा के स्कैनर में खराबी के कारण आपका फास्टैग रीड नहीं हो पाता है, तो टोल कर्मचारियों को कैश देने की गलती बिल्कुल न करें। ऐसे समय में UPI के जरिए 1.25 गुना चार्ज देकर डिजिटल पेमेंट करें और उसकी रसीद जरूर प्राप्त करें।
























