ईरान के रक्षा मंत्री मेहरदाद अखलाघी ने रविवार को चेतावनी दी कि अगर तेहरान पर कोई हमला किया गया तो उसका जवाब आनुपातिक, निर्णायक और प्रभावशाली होगा। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ दोबारा सैन्य टकराव शुरू हुआ तो यह लंबी जंग में बदल सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी मर्जी से यह तय नहीं कर पाएंगे कि युद्ध कब खत्म होगा। ईरानी रक्षा मंत्री ने कहा, “जो लोग हमें धमकी देते हैं, वे ईरान की रक्षात्मक प्रतिक्रिया का दायरा, समय या परिणाम तय नहीं कर सकते।” उनका कहना है कि किसी भी बाहरी हमले के बाद ईरान अपने हिसाब से जवाबी कार्रवाई करेगा। यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले किए थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच करीब 40 दिनों तक भीषण सैन्य संघर्ष चला। अप्रैल में भारी लड़ाई धीरे-धीरे थम गई थी, लेकिन इसके बाद भी दोनों पक्षों के बीच रुक-रुककर तनाव और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी रहा।
ईरानी अधिकारियों ने लगातार चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका के साथ फिर युद्ध शुरू हुआ तो यह पहले के संघर्षों से कहीं अधिक लंबा खिंच सकता है।ईरान ने अमेरिका और इजराइल के कथित हमलों से जुड़े दस्तावेज और तस्वीरें अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) को सौंपे हैं। अल जजीरा के अनुसार, इन दस्तावेजों को संगठन के सदस्य देशों के बीच औपचारिक रूप से प्रसारित किया गया है। इन सबूतों को ‘महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा’ विषय के तहत रखा गया है। लंदन में 2 से 6 नवंबर तक होने वाली परिषद की बैठक में इन पर विचार किया जाना है। ईरान का कहना है कि समुद्री बुनियादी ढांचे पर हमले अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी और नाविकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। उसका दावा है कि समुद्री यातायात नियंत्रित करने वाले तंत्र पर हमलों से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है।वहीं, आपातकालीन बचाव केंद्रों के नष्ट होने से समुद्री आपदाओं के समय राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इस बीच ईरान ने रविवार को ब्रिटेन के खिलाफ भी बड़ा कदम उठाया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने ब्रिटेन की रॉयल नेवी और रॉयल एयर फोर्स को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया। इसके साथ ही ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी एमआई-6 को शत्रुतापूर्ण समूह की श्रेणी में रखा गया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह फैसला देश की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के आधार पर लिया गया है। मंत्रालय ने आरोप लगाया कि ब्रिटेन ने अमेरिका और इजराइल के ईरान के खिलाफ युद्ध में सैन्य और रसद सुविधाएं उपलब्ध कराकर हिस्सा लिया।























