UP STF का बड़ा एक्शन: कस्टडी से फरार 1 लाख का इनामी मुठभेड़ में ढेर, 19 साल का अपराध साम्राज्य खत्म

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shahar samta news

Gorakhpur : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक बहुत बड़ी खबर आ रही है, जहां यूपी एसटीएफ की लखनऊ और गोरखपुर यूनिट ने एक बड़े ज्वाइंट ऑपरेशन में 1 लाख रुपए के इनामी बदमाश मुस्तफिजुल रहमान उर्फ बाबू को एनकाउंटर में ढेर कर दिया है। इस मुठभेड़ के दौरान दोनों तरफ से ताबड़तोड़ गोलियां चलीं, जिसमें एसटीएफ का एक हेड कांस्टेबल भी गोली लगने से घायल हुआ है। घायल जवान को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह मुठभेड़ गोरखपुर के रामनगर करजहा से कुशीनगर जाने वाली लेन के पास हुई। एसटीएफ को पुख्ता इनपुट मिला था कि मुस्तफिजुल इसी इलाके के आसपास छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही एसटीएफ की टीम ने पूरे इलाके की घेराबंदी शुरू कर दी। खुद को पुलिस के जाल में बुरी तरह घिरा देख मुस्तफिजुल ने सरेंडर करने के बजाय सीधे एसटीएफ टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

महाराष्ट्र की पुलिस कस्टडी से भागा था बाबू-मारे गए बदमाश की हिस्ट्रीशीट खंगालने पर पता चला कि मुस्तफिजुल रहमान उर्फ बाबू मूल रूप से आजमगढ़ जिले के मेहनगर थाना क्षेत्र के खुन्दनपुर गांव का रहने वाला था। वह कोई छोटा-मोटा अपराधी नहीं था, बल्कि उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक उसके जुर्म का जाल फैला था। उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और लूट जैसे संगीन अपराधों के 10 से अधिक मामले दर्ज थे। हैरान करने वाली बात यह है कि दिसंबर 2024 में वह महाराष्ट्र के अमरावती जिले में पुलिस की हिरासत से चकमा देकर फरार हो गया था। तब से महाराष्ट्र और यूपी पुलिस लगातार उसकी तलाश में खाक छान रही थी, लेकिन वह हाथ नहीं आ रहा था। उसकी इसी फरारी और बढ़ते अपराधों को देखते हुए पुलिस ने उस पर एक लाख रुपए का इनाम घोषित कर दिया था।

2003 से शुरू हुआ था जुर्म का यह सफर-अगर मुस्तफिजुल के आपराधिक रिकॉर्ड पर नजर डालें, तो उसने दो दशक से भी पहले अपराध की दुनिया में कदम रख दिया था:-
– साल 2003: उसके खिलाफ पहला मुकदमा चोरी का दर्ज हुआ था।
– साल 2008: उसने सीधे हत्या के प्रयास जैसी बड़ी वारदात को अंजाम दिया।
– साल 2011 और 2012: हत्या और कातिलाना हमले के मामलों में उसका नाम आया, जिसके बाद वह फरार हो गया और पुलिस को उसकी संपत्ति तक कुर्क करनी पड़ी।
– साल 2021 से 2024: फरारी के दौरान भी उसने रंगदारी, धमकी, मर्डर की साजिश और नए अपराधों को अंजाम देना जारी रखा।एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, मुस्तफिजुल लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। आजमगढ़ से लेकर महाराष्ट्र तक उसके नेटवर्क फैले थे। पुलिस कस्टडी से भागने के बाद वह और ज्यादा शातिर हो गया था, लेकिन आखिरकार गोरखपुर में उसके जुर्म के इस लंबे सफर का अंत हो गया।

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