कॉकरोच जनता पार्टी संस्थापक अभिजीत दिपके का खुलासा, विदेशी पढ़ाई की फंडिंग पर तोड़ी चुप्पी

0
5

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपनी विदेश शिक्षा के खर्च को लेकर उठ रहे सवालों पर जवाब दिया है। दिपके जून में भारत लौटे थे और इसके बाद उन्होंने देश के बड़े विरोध प्रदर्शनों में से एक का नेतृत्व किया। उन्होंने अमेरिका के मैसाचुसेट्स स्थित Boston University के कॉलेज ऑफ कम्युनिकेशन से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर ऑफ साइंस (MS) की डिग्री हासिल की।

दिपके ने एक इंटरव्यू में कहा,“मुझे बोस्टन यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप मिली थी और बाकी खर्चों के लिए मैंने एजुकेशन लोन लिया था। मुझे वह लोन चुकाना है।” उन्होंने फंडिंग से जुड़ा एक स्कॉलरशिप दस्तावेज भी साझा किया। दस्तावेज के अनुसार, बोस्टन यूनिवर्सिटी ने उन्हें डीन स्कॉलरशिप के तहत प्रति सेमेस्टर 12,500 डॉलर दिए। तीन सेमेस्टर में यह राशि कुल 37,500 डॉलर थी। यह बयान गुजरात के एक RTI कार्यकर्ता द्वारा उनकी विदेश शिक्षा की फंडिंग की जांच की मांग किए जाने के बाद आया। दिपक का जवाब गुजरात के एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा उनकी विदेश में शिक्षा के लिए धन जुटाने के बारे में जानकारी मांगे जाने के बाद आया।

जंतर-मंतर प्रदर्शन की फंडिंग पर बोले दिपके 
दिपक ने जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शनों के दौरान और भविष्य में सीजेपी के वित्तपोषण के बारे में भी बताया। बरखा दत्त से बात करते हुए दिपक ने कहा, “हम क्राउडफंडिंग के माध्यम से धन जुटाएंगे,” और साथ ही यह भी कहा कि सीजेपी इस बारे में पारदर्शी रहेगी। दिपक ने यह भी दोहराया कि लोग स्वयं जंतर-मंतर पर भोजन वितरित करने आए थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के निचले स्तर के अधिकारी भी विरोध प्रदर्शन के प्रति सहानुभूति रखते थे।

उन्होंने कहा, “मैं आपसे झूठ नहीं बोलूंगा, तीन लोग मास्क से ढके हुए हमारे पास आए और उन्होंने कहा कि वे विरोध प्रदर्शनों के लिए आभारी हैं। निचले रैंक के अधिकारी हमारे प्रति सहानुभूति रखते थे, उच्च रैंक के अधिकारी गृह मंत्रालय से आदेश ले रहे थे।

गुजरात के RTI एक्टिविस्ट ने जानकारी मांगी

सूरत के RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने अभिजीत दिपके के पिता भगवानराव दिपके की आर्थिक स्थिति को लेकर जांच की मांग की थी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर उनके पिता महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) में जूनियर इंजीनियर थे और उनकी मासिक आय लगभग 60,000–65,000 रुपये थी, तो अमेरिका में पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया गया।

तिवारी ने महाराष्ट्र सरकार, चुनाव आयोग और केंद्रीय GST विभाग को भी शिकायत भेजी थी। उन्होंने CJP के लिए घोषित कानूनी सहायता फंड पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर CJP के लिए 1 करोड़ रुपये का कानूनी रक्षा फंड बनाया गया है, तो चुनाव आयोग को यह जांच करनी चाहिए कि क्या यह संगठन जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत राजनीतिक दल है या नहीं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here