ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने युद्ध शुरू नहीं किया था, बल्कि विरोधियों ने सैन्य दबाव, प्रतिबंधों और राजनीतिक दबाव के जरिए देश को कमजोर करने की कोशिश की। पेजेशकियान ने दावा किया कि विरोधी ईरान में सीरिया जैसे हालात पैदा कर 48 घंटे में कब्जे की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन उनकी योजना सफल नहीं हुई। उनके ये दावे ईरानी सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक इंटरव्यू के दौरान सामने आए। पेजेशकियान ने कहा कि ईरान की ओर से यह संघर्ष शुरू नहीं किया गया था। उनके मुताबिक, युद्ध से पहले उनकी सरकार बातचीत और कूटनीति के जरिए विवाद का समाधान निकालने की कोशिश कर रही थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधियों को उम्मीद थी कि सैन्य दबाव और देश के भीतर पैदा होने वाली परेशानियों से ईरान कमजोर होकर बिखर जाएगा। लेकिन उनके अनुसार ऐसा नहीं हुआ और ईरान अपनी राजनीतिक और सैन्य क्षमता के साथ खड़ा रहा। पेजेशकियान ने कहा कि मौजूदा मुश्किलों के बावजूद ईरान अपने रास्ते पर आगे बढ़ता रहेगा और भविष्य में और मजबूत होकर सामने आएगा। पेजेशकियान के बयान का सबसे बड़ा हिस्सा उनका 48 घंटे वाला दावा रहा। उन्होंने कहा कि विरोधियों ने सीरिया में हुए घटनाक्रम जैसी स्थिति ईरान में पैदा करने की योजना बनाई थी। उनके मुताबिक, अमेरिका और इजरायल को उम्मीद थी कि युद्ध, सैन्य दबाव और दूसरे कदमों के जरिए ईरान को तेजी से अस्थिर किया जा सकेगा। पेजेशकियान ने दावा किया कि इस पूरी योजना का लक्ष्य ईरान को बेहद कम समय में कमजोर करना था। हालांकि, 48 घंटे में ईरान पर कब्जे की योजना का स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है, इसलिए यह बात पेजेशकियान के दावे के तौर पर ही देखी जानी चाहिए।



















