वंदे मातरम् पर सियासत तेज! केरल के पूर्व CM का आरोप- RSS एजेंडा थोपने की कोशिश

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तिरुवनंतपुरम: स्वतंत्रता दिवस समारोहों में ‘वंदे मातरम्’ के पूरे संस्करण के गायन को लेकर केरल में राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता और CPI(M) नेता पिनाराई विजयन ने राज्य सरकार के उस निर्देश का कड़ा विरोध किया है, जिसमें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रगीत का पूरा संस्करण गाने के निर्देश दिए गए हैं। विजयन ने इस फैसले को वापस लेने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि इसके पीछे RSS के एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है।

पूरे संस्करण पर आपत्ति

पूर्व सीएम पिनाराई विजयन ने कहा कि देश में ‘वंदे मातरम’ के पूरे संस्करण को अनिवार्य रूप से गाने की ऐसी कोई स्थापित परंपरा नहीं रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत की शुरुआती पंक्तियां ही पर्याप्त हैं और सरकार को अपने निर्देश पर पुनर्विचार करना चाहिए।

विवाद की शुरुआत केरल के मुख्य सचिव की ओर से जारी निर्देश के बाद हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, 6 अगस्त को जारी पत्र केंद्र के संस्कृति मंत्रालय से मिले ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से जुड़े निर्देशों के संदर्भ में था। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान इस वर्ष 9 से 17 अगस्त तक आयोजित किया जा रहा है। इसी दौरान ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है। राज्य सरकार के पत्र में कहा गया कि ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन किया जाएगा।

धर्मनिरपेक्ष परंपरा से समझौता’

पिनाराई विजयन ने पूरे गीत के गायन को लेकर सरकार के फैसले पर सवाल उठाया। उनका आरोप है कि इस तरह का निर्देश राज्य की धर्मनिरपेक्ष परंपरा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने UDF सरकार और राज्य के नेतृत्व पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकारी समारोहों में पूरे ‘वंदे मातरम’ को अपनाना कांग्रेस के पारंपरिक धर्मनिरपेक्ष रुख से अलग है। विजयन ने दावा किया कि सरकार राजनीतिक और वैचारिक दबाव में यह फैसला ले रही है। हालांकि, सरकार की ओर से इस फैसले को RSS का एजेंडा बताए जाने के आरोप पर क्या प्रतिक्रिया है, यह इस विवाद में अहम होगा।

शपथ ग्रहण समारोह से भी जुड़ा है विवाद

‘वंदे मातरम’ को लेकर यह राजनीतिक विवाद केवल स्वतंत्रता दिवस समारोह तक सीमित नहीं है। विजयन ने हालिया UDF कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह का भी जिक्र किया, जहां ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाए जाने को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई थी। विजयन का कहना है कि सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के इस्तेमाल को लेकर ऐसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए जिससे समाज के किसी वर्ग को अलग-थलग महसूस हो।

संसद में कानून के बाद और अहम हुआ मुद्दा

‘वंदे मातरम’ को लेकर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब संसद ने हाल ही में Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 पारित किया है। इस संशोधन के जरिए ‘वंदे मातरम’ को 1971 के कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान से संबंधित कानूनी संरक्षण के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है। संशोधित प्रावधान के तहत ‘वंदे मातरम’ के गायन को जानबूझकर रोकना या उसके गायन में बाधा डालना दंडनीय प्रावधानों के दायरे में आएगा।

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