नई दिल्ली: जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कैश कांड केस में संसदीय जांच समिति की ओर से रिपोर्ट सौंप दी गई। समिति ने कहा कि दिल्ली स्थित उनके आधिकारिक आवास में बड़ी मात्रा में भारतीय करेंसी नोटों की मौजूदगी और उसके सोर्स या मालिकाना हक को लेकर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। साथ ही संसद की जांच समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा के ऊपर लगे तीनों आरोपों को सही पाया है।
क्या है पूरा मामला?-साल 2025 में जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम से नकदी मिलने से जुड़ा है। जहां आग की घटना के दौरान नोट जले मिले थे। इस मामले में जांच समिति ने पाया कि जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोर रूम में 500 रूपये के नोटों के बंडल और अधजले नोट मिले थे। संसदीय पैनल की रिपोर्ट बुधवार, 12 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा में पेश की गई। जिसके मुताबिक, स्टोररूम में 500 रुपए के नोटों की काफी मात्रा मिली थी।
दिल्ली से ट्रांसफर हुए थे-घटना के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाईकोर्ट हो गया था। लेकिन इस साल अप्रैल में हाईकोर्ट के जज पद से इस्तीफा दे दि। घटना के दिन को लेकर फायर सर्विस और पुलिस के कर्मचारियों ने जांच के दौरान बताया कि नोट सिर्फ एक जगह नहीं थे, बल्कि स्टोर रूम के बड़े हिस्से में फैले हुए थे। दिल्ली फायर सर्विस के कर्मचारी अंकित सहगल ने जानकारी दी थी कि उसने ₹500 के नोटों के बंडल देखे थे, जो स्टोर रूम में 7-8 फीट तक फैले हुए थे।




















