नेशनल : नेपाल में बुधवार को अचानक आई भयानक बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई और लगभग 4,900 लोग अब भी लापता हैं। बचावकर्मी बारिश और मलबे के बीच काम कर रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि इस आपदा का जलवायु परिवर्तन से संबंध अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मजबूती से उठाया जाना चाहिए। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के खिसकने से आई अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई, जिससे हर तरफ बर्बादी फैल गई और हजारों लोग लापता हो गए।
नेपाल की संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बुधवार को कहा कि भोटेकोशी नदी में भयावह बाढ़ आने से मची तबाही जलवायु परिवर्तन के कारण हुई और इसके प्रभावों को कम करने करने की जिम्मेदारी भी वैश्विक समुदाय पर है। उन्होंने कहा, “जानकारों के मुताबिक, रसुवा जिले की भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ हिमालय में बर्फ और चट्टानों के खिसकने की वजह से हुई थी। यह घटना दिखाती है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को बढ़ते खतरों का सामना करना पड़ रहा है।”
शाह ने जोर देते हुए कहा, “इसलिए, हमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मजबूती से यह बात रखनी होगी कि यह आपदा जलवायु परिवर्तन से जुड़ी है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन में पूरी दुनिया की भूमिका है और इसके असर को संभालने और कम करने की जिम्मेदारी भी वैश्विक समुदाय की है। नेपाल पुलिस के अनुसार, चितवन से 348, नवलपरासी पूर्व से 217, नवलपरासी पश्चिम से 190 और नुवाकोट से 155 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह गोरखा से 66, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनाहूं से 38 शव बरामद हुए हैं।
पुलिस ने बताया कि 1,113 शवों का पोस्टमार्टम और कानूनी पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, जबकि 95 शव परिजनों को सौंपे जा चुके हैं। लापता परिजनों की पहचान में परिवारों की मदद के लिए 911 अज्ञात शवों का विवरण नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। पुलिस के मुताबिक,अब तक सुरक्षा बलों ने प्रभावित इलाकों से 6,541 लोगों को सुरक्षित निकाला है, जबकि 4,858 लापता लोगों की तलाश अभी जारी है। अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में 7,912 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है।
ये पुलिसकर्मी खोज एवं बचाव अभियान, राहत सामग्री के वितरण और बरामद शवों के प्रबंधन में जुटे हैं। पुलिस की टीम उच्च जोखिम वाले इलाकों से परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, मलबे के कारण बंद सड़कों को साफ करने तथा स्थानीय प्रशासन और लोगों के साथ मिलकर खोज, बचाव और राहत अभियानों के समन्वय का काम भी कर रही हैं। हालांकि, लगातार हो रही बारिश रसुवा और नुवाकोट में खोज और बचाव कार्यों में बाधा डाल रही है। जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के मौसम विज्ञानी रोजान लामिछाने के अनुसार, बुधवार अपराह्न भोटेकोशी बाढ़ से प्रभावित इलाकों में मध्यम बारिश होने की संभावना है।
लामिछाने ने बताया कि भोटेकोशी बाढ़ से प्रभावित आसपास के इलाकों में भी दोपहर के समय मध्यम बारिश हो सकती है, जिनमें रसुवा, नुवाकोट और धादिंग शामिल हैं। विभाग के अनुसार, पिछले 12 घंटों में सबसे अधिक बारिश सिंधुपालचोक के नोस्याम पाटी स्थित मौसम केंद्र में दर्ज की गई, जहां 60.2 मिलीमीटर बारिश हुई। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार रात को कोशी, बागमती और गंडकी प्रांतों के पहाड़ी इलाकों में कुछ जगहों पर भारी बारिश भी हो सकती है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के कार्यकारी प्रमुख धर्म राज उप्रेती ने बताया कि बारिश के कारण सुरंग में पानी भरने से भोटेकोशी बाढ़ प्रभावित इलाकों में खोज एवं बचाव अभियान के समक्ष अतिरिक्त चुनौतियां पैदा हो गई हैं। उप्रेती के अनुसार, रातभर हुई बारिश के कारण जलविद्युत परियोजना की सुरंग में पानी भर गया। परियोजना की सुरंगों के अंदर कठिन परिस्थितियों के कारण खोज एवं बचाव अभियान प्रभावित हुआ है। नेपाल के स्वतंत्र विद्युत उत्पादक संघ के पूर्व अध्यक्ष गणेश कार्की ने कहा कि सुरंगों तक उपकरण आसानी से नहीं पहुंचाए जा पाने के कारण भी बचाव अभियान धीमा हो गया है। उन्होंने कहा कि सुरंगों के प्रवेश द्वारों का पता लगाना भी मुश्किल हो गया है।
कार्की ने कहा, ”नदी के साथ बहकर आया मलबा सुरंगों के ऊपर तक पहुंच गया है। सुरंग के प्रवेश द्वारों की सही जगह का पता लगाना भी मुश्किल हो गया है।” संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सेना और निजी हेलीकॉप्टर बचाव कार्य और लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने में जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि संकट की गंभीरता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय मदद लेने से इनकार करने का “कोई सवाल ही नहीं” उठता, और साथ ही यह भी कहा कि नेपाल ने शुरू से ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ तालमेल बनाए रखा है।
प्रधानमंत्री ने कहा, ”अब तक भारत, पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कतर, स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन, जापान और सिंगापुर जैसे मित्र देशों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए मदद दी है।” उन्होंने कहा, ”इसी तरह, एशियाई विकास बैंक(एडीबी), विश्व बैंक, यूरोपीय संघ (ईयू) और संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय विकास साझेदारों ने भी मदद करने का वादा किया है।” प्रधानमंत्री ने सदन को बताया कि जलविद्युत परियोजनाओं वाली जगहों पर बचाव कार्यों के लिए भारत, चीन और दक्षिण कोरिया से विशेषज्ञों के दल भेजे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार दोपहर तक प्रधानमंत्री राहत कोष में 7 अरब नेपाली रुपये से अधिक रकम जमा हो चुकी है। उन्होंने कहा, “हमारे पास रोने का समय नहीं है”, और जोर दिया कि देश को हिम्मत और दृढ़ संकल्प के साथ इस आपदा का सामना करना होगा।



















