नेपाल में 9 दिन बाद सुरंग से जिंदा निकले 2 मजदूर, पत्नी बोली- मेरे पति को दूसरी जिंदगी मिल गई

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काठमांडू : मध्य नेपाल में त्रिशूली नदी में अचानक आई बाढ़ के नौ दिन बाद त्रिशूली 3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग से दो लोगों को बचाया गया है। नेपाल सेना के जनसंपर्क निदेशालय के अनुसार, दोनों व्यक्तियों की पहचान कबीर महार्जन (45) और संजय साह (30) के रूप में हुई है। काठमांडू निवासी महार्जन इस परियोजना पर एक यांत्रिक पर्यवेक्षक के रूप में काम कर रहे थे जबकि साह ‘फोरमैन’ के रूप में कार्यरत थे। 

नेपाली सेना के प्रवक्ता राजा राम बस्नेत के अनुसार, महार्जन की हालत गंभीर बताए जाने के कारण उन्हें हवाई मार्ग से काठमांडू ले जाया गया है। वहीं, साह का नुवाकोट के त्रिशूली अस्पताल में इलाज जारी है। महार्जन की पत्नी ने कहा कि उनके पति को “दूसरी जिंदगी” मिली है। उन्होंने उन्हें बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले बचावकर्मियों का आभार व्यक्त किया। समाचार पत्र ‘काठमांडू पोस्ट’ ने उनकी पत्नी हीरा शोभा के हवाले से कहा, “वह दूसरी जिंदगी लेकर लौटे हैं। हम बेहद खुश हैं।” उन्होंने कहा, “हम इंतजार कर रहे थे। मैं अब अपने पति को देखने अस्पताल जा रही हूं।” उन्होंने बचाव अभियान में शामिल सभी लोगों का धन्यवाद किया। साह मधेस प्रांत के सप्तरी जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि जब यह दुर्घटना हुई उस समय वह नियंत्रण कक्ष में काम कर रहे थे। 

कुछ और लोगों के फंसे होने की आशंका
सुरंग से बाहर निकाले जाने के बाद साह ने नेपाली सेना की चिकित्सा टीम से कहा, “मैं नियंत्रण कक्ष में काम कर रहा था। मेरी जिम्मेदारी सभी की जान बचाना थी।” उन्होंने कहा कि हादसे के बाद उन्होंने सभी से भागने के लिए कहा, लेकिन जब तक अन्य लोग बाहर निकले तब तक उनके लिए बच कर निकल पाने में बहुत देर हो चुकी थी। यह पूछे जाने पर कि अंदर अब भी कितने लोग फंसे हो सकते हैं, साह ने कहा कि उन्होंने अपने आसपास तीन या चार लोगों के बारे में सुना था या उनसे बात की थी। साह के अनुसार, सुरंग के भीतर और गहराई में तथा बिजलीघर के आसपास के हिस्से में भी कुछ और लोगों के फंसे होने की आशंका है। उन्होंने कहा, “हो सकता है कि सभी लोग बाहर नहीं निकल पाए हों। सुरंग बहुत लंबी है।” उन्होंने आशंका जताई कि बाढ़ के पानी का तेज बहाव लोगों को सुरंग के भीतर और गहराई तक बहाकर ले गया होगा। नेपाली सेना के नेतृत्व में सुरक्षा कमान विशेष उपकरणों की मदद से तलाश और बचाव अभियान में जुटी हुई है। 

समाचार पत्र ‘काठमांडू पोस्ट’ की खबर के अनुसार इससे पहले बचावकर्मियों ने सुरंग के अंदर से आवाजें सुनने के बाद वहां फंसे लोगों से संपर्क स्थापित किया और फिर यह बचाव अभियान चलाया गया। इसमें बताया गया कि आवाजें सुनने के बाद नेपाल की सेना और सशस्त्र पुलिस बल ने उन तक पहुंचने की कोशिशें तेज कर दीं। नेपाल के स्वतंत्र बिजली उत्पादक संघ के अनुसार, 11 जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 600 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। इस बाढ़ में जान गवांने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 1,282 हो गई, जबकि 4,700 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन के कारण आई इस बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। 

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