हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: 39 शहरों को ट्रैफिक जाम से मिलेगी मुक्ति, शिफ्ट होंगी ट्रांसपोर्ट गतिविधियां

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हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: 39 शहरों को ट्रैफिक जाम से मिलेगी मुक्ति, शिफ्ट होंगी ट्रांसपोर्ट गतिविधियां

चंडीगढ़: हरियाणा में बढ़ती औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच शहरों की सड़कों पर बढ़ते भारी वाहनों के दबाव को कम करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ी पहल शुरू की है। राज्य के 39 शहरों के बाहरी क्षेत्रों में ट्रांसपोर्ट नगर विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए सरकार ने करीब 8 हजार एकड़ जमीन जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

सरकार की ओर से भू-स्वामियों और जमीन एग्रीगेटर्स से ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से जमीन की पेशकश मांगी गई है। इच्छुक लोग 31 अक्टूबर 2026 तक अपनी जमीन का प्रस्ताव पोर्टल पर दे सकेंगे। फिलहाल सरकार का ध्यान जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर है। इसके बाद प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर शहरवार जमीन की स्थिति, स्थान और उपयुक्तता का आकलन किया जाएगा।

शहरों की सड़कों से बाहर शिफ्ट होंगी ट्रांसपोर्ट गतिविधियां
प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगरों का उद्देश्य शहरों के भीतर चल रही ट्रक पार्किंग, माल चढ़ाने-उतारने तथा ट्रांसपोर्ट से जुड़ी अन्य गतिविधियों को एक निर्धारित स्थान उपलब्ध कराना है। वर्तमान में अनेक शहरों में भारी वाहन सड़क किनारे या बाजारों के आसपास खड़े होते हैं। माल की लोडिंग और अनलोडिंग के दौरान भी मुख्य सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है।
इस व्यवस्था के कारण कई जगह यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ शहरों के भीतर जाम की स्थिति भी बनती है। ट्रांसपोर्ट नगर विकसित होने के बाद भारी वाहनों की पार्किंग और माल ढुलाई के लिए शहर की सामान्य सड़कों पर निर्भरता कम करने की संभावना है।

एनसीआर के साथ औद्योगिक बेल्ट को भी रखा दायरे में
सरकार ने प्रस्तावित योजना को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखा है। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे एनसीआर के प्रमुख शहरों के साथ रेवाड़ी, धारूहेड़ा, बावल, रोहतक, झज्जर, सोनीपत, बहादुरगढ़ और खरखौदा को भी सूची में शामिल किया गया है। इसके अलावा सांपला, गन्नौर, गोहाना, समालखा और नरवाना जैसे शहरों को भी योजना के दायरे में रखा गया है। इससे साफ है कि प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगरों की योजना का विस्तार एनसीआर, औद्योगिक क्षेत्रों और राज्य के विभिन्न हिस्सों में स्थित प्रमुख व्यापारिक शहरों तक किया जा रहा है।

गुरुग्राम से बावल तक माल ढुलाई का बड़ा दबाव
गुरुग्राम और फरीदाबाद में एनसीआर से जुड़े भारी यातायात और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण माल परिवहन लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है। वहीं रेवाड़ी-धारूहेड़ा-बावल औद्योगिक क्षेत्र में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां होने के कारण माल ढुलाई से जुड़े वाहनों की आवाजाही रहती है।

इसी तरह सोनीपत-खरखौदा-बहादुरगढ़ क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ ट्रांसपोर्ट क्षेत्र की जरूरत भी बढ़ी है। रोहतक और झज्जर के अलावा सांपला, गन्नौर, गोहाना और समालखा जैसे शहर प्रमुख सड़क मार्गों से जुड़े हैं। नरवाना को योजना में शामिल करने से इसका दायरा राज्य के मध्य हिस्से तक पहुंचता है।

8 हजार एकड़ जमीन के लिए मांगे गए प्रस्ताव
सरकार ने 39 शहरों के लिए करीब 8 हजार एकड़ जमीन की आवश्यकता सामने रखी है। अब भू-स्वामी और जमीन एग्रीगेटर ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से अपनी जमीन की पेशकश कर सकते हैं।
जमीन की पेशकश के बाद सरकार के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल उसकी लोकेशन और उपयोगिता का होगा। ट्रांसपोर्ट नगरों को शहरों से बाहर विकसित करने की योजना है, इसलिए ऐसी जमीन की जरूरत होगी जहां भारी वाहनों की आवाजाही आसानी से हो सके और भविष्य में पर्याप्त आधारभूत सुविधाएं विकसित की जा सकें।

जमीन मिलने के बाद तय होगा शहरवार खाका
फिलहाल सरकार ने ट्रांसपोर्ट नगरों के लिए जमीन जुटाने का चरण शुरू किया है। अभी प्रत्येक शहर में ट्रांसपोर्ट नगर का आकार, सटीक स्थान और वहां उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं का विस्तृत खाका सामने नहीं आया है। ई-भूमि पोर्टल पर प्राप्त प्रस्तावों की जांच के बाद शहरवार उपलब्धता का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि किस शहर में कितनी जमीन उपलब्ध हो सकती है और उसमें से कितनी जमीन प्रस्तावित परियोजना के लिए उपयुक्त है।

यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने की कवायद
प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगरों को केवल ट्रकों की पार्किंग तक सीमित रखने के बजाय शहरों में माल परिवहन से जुड़ी गतिविधियों को व्यवस्थित करने के अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। निर्धारित क्षेत्रों में ट्रांसपोर्ट से संबंधित गतिविधियां आने से शहरों के मुख्य बाजारों और सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव कम किया जा सकता है।
विशेषकर औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्रों में ऐसी व्यवस्था से माल की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की संभावना है। साथ ही शहरों के भीतर सड़क किनारे ट्रकों की पार्किंग और अनियोजित लोडिंग-अनलोडिंग की समस्या को भी नियंत्रित करने का रास्ता बन सकता है।

31 अक्टूबर तक जमीन देने का मौका
सरकार ने इच्छुक भू-स्वामियों और जमीन एग्रीगेटर्स को 31 अक्टूबर 2026 तक ई-भूमि पोर्टल पर जमीन की पेशकश करने का अवसर दिया है। इसके बाद प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर आगे की प्रक्रिया बढ़ाई जाएगी। इस तरह फिलहाल योजना का पहला चरण जमीन जुटाने पर केंद्रित है। जमीन की उपलब्धता और उपयुक्तता सामने आने के बाद ही 39 शहरों में ट्रांसपोर्ट नगरों के विकास का वास्तविक स्वरूप तय होगा। आने वाले चरण में शहरवार जमीन, क्षेत्रफल, कनेक्टिविटी और प्रस्तावित सुविधाओं के आधार पर विस्तृत योजना तैयार किए जाने की संभावना है।

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