नई दिल्ली: देश भर में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे सियासी बवाल तेज चल रहा है। इसे लेकर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद एवं महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट कर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि वोट चोर अब उत्तर प्रदेश में SIR के जरिए वोट डकैती कर रहा है। मोदी-शाह की षड्यंत्रकारी जोड़ी उत्तर प्रदेश में अपनी निश्चित हार के डर से वोट चोरी का अपना आखिरी हथियार आजमा रही है। The Reporter’s Collective की रिपोर्ट बताती है कि यूपी में वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए, संदिग्ध तरीके से नए वोटर जोड़े गए और पूरी प्रक्रिया में नियमों का गंभीर उल्लंघन हुआ।
1.उत्तर प्रदेश में SIR के दौरान 2.96 करोड़ वोटर हटाए गए। जिन राज्यों में अब तक SIR हो चुका है, उनमें यह सबसे बड़ी संख्या है।
2. करीब 16 लाख वोटर Form 6 के जरिए जोड़े गए, लेकिन कानून के मुताबिक जिन वोटरों को जोड़ा जा रहा है, उनकी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए थी। इन 16 लाख वोटरों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया और अब भी UP CEO (Chief Electoral Officer) ने उनकी जानकारी देने से इनकार किया है। इस मामले में UP CEO और ECI एक-दूसरे के कंधों पर बात डालने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों संस्थान यह स्पष्ट कर दें कि यह विशेष अनुरोध कहां से आई थी और किसके कहने पर यह सब हुआ?
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SIR सुनवाई के बाद ERONet सॉफ्टवेयर से 85,854 पहले से भरे हुए Form 7 generate किए गए, ताकि वोटरों के नाम हटाए जा सकें। ये Form 7 EROs (Electoral Registration Officers) के नाम और उनके हस्ताक्षर के साथ generate हुए, जिसके बाद उनके पास उन नामों को हटाने के अलावा लगभग कोई विकल्प नहीं बचा। इन deletions का कोई स्पष्ट कारण भी नहीं दिया गया। यह प्रक्रिया नियमों के भी खिलाफ थी, क्योंकि ERO एक ही समय पर आपत्ति दर्ज करने वाला और उसी आपत्ति पर फैसला करने वाला कैसे हो सकता है? नियमों के अनुसार, क्लेम्स और आपत्तियों का समय समाप्त होने के बाद फ़ॉर्म 7 में आपत्ति दर्ज नहीं की जा सकती। यानी घपला तीनों स्तर पर हुआ है-2.96 करोड़ नामों को बड़े पैमाने पर हटाना, 16 लाख संदिग्ध तरीके से जोड़े गए वोटर और 85,854 रहस्यमयी तरीके से हटाए गए नाम।
राहुल गांधी जी और पूरा विपक्ष मोदी-शाह प्रायोजित वोट चोरी के खिलाफ सड़कों पर है और यह लड़ाई अब अपने निर्णायक दौर की तरफ बढ़ रही है। जाते-जाते CEC ज्ञानेश कुमार भाजपा की झोली में उत्तर प्रदेश की जनता का जनादेश चुरा करके डाल देना चाहते हैं, लेकिन अब यह खेल खत्म हो चुका है।




















