पाकिस्तान में PTI सरकार को निलंबित किए जाने के बाद इमरान खान की बढ़ी मुश्किलें

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पाकिस्तान में PTI सरकार को निलंबित किए जाने के बाद इमरान खान की बढ़ी मुश्किलें

पाकिस्तान में जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उनके राजनीतिक गढ़ खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने आपातकाल घोषित कर दिया है। इसके साथ ही पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार को निलंबित कर दिया गया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब इमरान खान के परिवार ने उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जताते हुए तत्काल चिकित्सा सहायता की मांग की है।

अफगानिस्तान की सीमा से लगे खैबर पख्तूनख्वा में हाल के दिनों में उग्रवादी हमलों में तेजी आई है। प्रांतीय सरकार पर इन हमलों से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया गया है। आपातकाल लागू होने के बाद प्रांत की कमान राष्ट्रपति जरदारी की पार्टी के एक नेता को सौंप दी गई है।

PTI ने फैसले को राजनीतिक साजिश बताया

इमरान खान की पार्टी PTI ने आपातकाल लागू करने के फैसले का विरोध करते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम बताया है। पार्टी का आरोप है कि सरकार इस फैसले के जरिए प्रांत के बजट और संसाधनों पर उसकी पकड़ कमजोर करना चाहती है। साथ ही, इसके जरिए इलाके पर राजनीतिक नियंत्रण मजबूत करने और इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर इस्लामाबाद की ओर प्रस्तावित मार्च को रोकने की कोशिश की जा रही है।

PTI ने बुधवार को पेशावर हाई कोर्ट में आपातकाल के फैसले को चुनौती दी। पार्टी के करीबी सहयोगी जुल्फी बुखारी ने कहा कि इमरान खान के बुनियादी मानवाधिकारों को आतंकवाद जैसे जटिल मुद्दे से जोड़ना पूरी तरह अनुचित है।

रिहाई और इलाज की मांग को लेकर प्रदर्शन की तैयारी

आपातकाल की घोषणा से पहले इमरान खान के हजारों समर्थक खैबर पख्तूनख्वा में जुटे थे। वे खान की रिहाई और बेहतर चिकित्सा सुविधा की मांग को लेकर इस्लामाबाद तक मार्च निकालने की तैयारी कर रहे थे। हालांकि, प्रदर्शन से पहले इमरान खान की तीन बहनों, पार्टी नेताओं और सैकड़ों समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया गया।

राजनीतिक विश्लेषक नजम सेठी के मुताबिक, मौजूदा घटनाक्रम से इमरान खान और उनकी पार्टी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि PTI अपने नेता को राहत दिलाने में नाकाम रही है, जबकि खैबर पख्तूनख्वा में उसकी सरकार भी हाथ से निकल गई है। पार्टी के कई नेता जेल में हैं, जिससे उसका राजनीतिक दबाव कमजोर हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से इमरान खान और पाकिस्तान के शक्तिशाली सेना प्रमुख आसिम मुनीर के बीच लंबे समय से जारी तनाव और बढ़ सकता है।

आंखों की रोशनी और स्वास्थ्य को लेकर चिंता

74 वर्षीय इमरान खान पूर्व क्रिकेटर हैं और 2018 से 2022 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे। वर्ष 2023 में भ्रष्टाचार के आरोपों में उन्हें जेल भेज दिया गया था। खान इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं। उनके परिवार और पार्टी ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। परिवार के अनुसार, खान की एक आंख की रोशनी प्रभावित हुई है, उनका ब्लड प्रेशर उतार-चढ़ाव का सामना कर रहा है और लंबे समय तक अकेले कैद में रहने से उनकी मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ रहा है। परिवार ने उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

सरकार और PTI के बीच बातचीत भी विफल

इमरान खान के समर्थन में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की आशंका के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने पिछले सप्ताह PTI के साथ बातचीत की थी। पार्टी ने खान को निजी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने, जेल में उनसे मुलाकात की अनुमति देने और लंदन में रह रहे उनके बेटों से फोन पर बातचीत कराने की मांग रखी थी।

पाकिस्तान के जूनियर गृह मंत्री तलाल चौधरी ने रॉयटर्स को बताया कि सरकार ने PTI की लगभग सभी मांगें स्वीकार कर ली थीं। हालांकि, सरकार ने बदले में पार्टी से खैबर पख्तूनख्वा में इस्लामी उग्रवाद की सार्वजनिक रूप से निंदा करने, हमलों में मारे गए सुरक्षाकर्मियों के अंतिम संस्कार में शामिल होने और आतंकवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का समर्थन करने की मांग की थी। चौधरी के अनुसार, PTI ने सरकार की इन शर्तों को स्वीकार नहीं किया।

पहले भी लागू हो चुका है आपातकाल

पाकिस्तान में वर्ष 1975 के बाद से प्रांतीय स्तर पर इस तरह की आपातकालीन स्थिति पांच बार लागू की जा चुकी है। इनमें तीन मामले खैबर पख्तूनख्वा, जबकि एक-एक मामला पंजाब और बलूचिस्तान प्रांत से जुड़ा रहा है। PTI के पिछले बड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी हिंसा देखने को मिली थी। दो साल पहले पार्टी का प्रदर्शन हिंसक झड़पों में बदल गया था, जबकि 2023 में इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद देशभर में दंगे भड़क उठे थे। ऐसे में खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लागू होने और इमरान खान की सेहत को लेकर बढ़ती चिंता ने पाकिस्तान में राजनीतिक तनाव को और गहरा कर दिया है।

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