मणिपुर में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। इम्फाल ईस्ट जिले के उयुमपोक इलाके में हुए हमले में चार लोगों की मौत के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी दो शव लेकर मुख्यमंत्री आवास पहुंचे और उन्हें बंगले के बाहर रखने की कोशिश की। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और बल प्रयोग किया। इस घटना के बाद राज्य में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच तनाव दोबारा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
जंगल से लकड़ी लेने गए ग्रामीणों पर हमला-जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे इम्फाल ईस्ट जिले के नोंगसुम हिल्स के पास स्थित उयुमपोक इलाके में यह घटना हुई। स्थानीय विधायक थोकचोम लोकेशोर सिंह के अनुसार, कुछ ग्रामीण जंगल में जलावन की लकड़ी इकट्ठा करने गए थे। इसी दौरान कथित तौर पर संदिग्ध कुकी उग्रवादियों ने उन पर हमला कर दिया। विधायक ने दावा किया कि ग्रामीणों ने किसी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई नहीं की थी और उन पर अचानक हमला किया गया। हालांकि, हमले की परिस्थितियों और इसके पीछे की वजहों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
हमले में तीन लोगों की पहचान, एक अन्य की भी मौत-हमले में जान गंवाने वालों में 35 वर्षीय अरुबम रोनिल (रोनिन), 44 वर्षीय लाइरेनलकपम इनाओबी और 32 वर्षीय क्षत्रिमयुम सुशील शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सुशील की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। घटना में तीन अन्य लोग भी घायल हुए हैं, जिनकी पहचान मेइसनाम सोमेंद्रो, बोनसन खिंगद्रम और नंगोम सुराज के रूप में हुई है। घायलों का इलाज इम्फाल के राज मेडिसिटी अस्पताल में चल रहा है।
मुख्यमंत्री आवास के बाहर शव रखकर जताया विरोध
घटना के बाद इलाके में गुस्सा फैल गया। बड़ी संख्या में लोग मृतकों के शव लेकर मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने दो शव मुख्यमंत्री के बंगले के मुख्य गेट के बाहर रखने की कोशिश की। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और बल प्रयोग किया। इस दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना ने राज्य में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैंप हटाने और आरोपियों पर कार्रवाई की मांग-स्थानीय विधायक थोकचोम लोकेशोर सिंह ने हमले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने घटनास्थल के पास मौजूद सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) व्यवस्था के तहत संचालित सिनाई कैंप को हटाने की मांग भी उठाई। विधायक का आरोप है कि असम राइफल्स ने ग्रामीणों को सुरक्षा का भरोसा दिया था, लेकिन इसके बावजूद हमला हुआ। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था में कथित चूक और हमले में शामिल लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
मई 2023 की हिंसा के बाद फिर बढ़ी चिंता-मणिपुर में मई 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद राज्य के कई इलाकों में लंबे समय तक तनाव बना रहा। हाल के दिनों में अपेक्षाकृत शांति के बीच इम्फाल ईस्ट और कुकी बहुल कांगपोकपी जिले की सीमा के पास हुई इस घटना ने एक बार फिर हालात बिगड़ने की आशंका बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों को डर है कि यदि समय रहते स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया और हमले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो राज्य में फिर व्यापक तनाव फैल सकता है। फिलहाल, हमले की परिस्थितियों और जिम्मेदार लोगों की पहचान को लेकर जांच जारी होने की जानकारी दी गई है।
























