ईरान में फिर तबाही मचाने जा रहा था इजराइल; ऐन वक्त पर ट्रंप ने नेतन्याहू को रोका, कहा-अभी एक काम पूरा करना बाकी 

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ईरान में फिर तबाही मचाने जा रहा था इजराइल; ऐन वक्त पर ट्रंप ने नेतन्याहू को रोका, कहा-अभी एक काम पूरा करना बाकी 

ईरान और इजराइल के बीच फिर बड़े सैन्य टकराव का खतरा मंडराने लगा है। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अक्टूबर में ईरान पर कई दिनों तक भीषण बमबारी करने की योजना बनाई थी। इसमें परमाणु ठिकानों के साथ बिजलीघरों जैसे नागरिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया जाना था। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले नई जंग शुरू करने को लेकर आपत्ति जताई, जिसके बाद योजना फिलहाल टाल दी गई। लेकिन इसे स्थायी रोक नहीं माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइली सेना ने 10 अक्टूबर वाले सप्ताहांत में कई दिनों तक चलने वाली बमबारी की योजना तैयार कर ली थी।

इसमें ईरान के परमाणु ठिकानों, शासन से जुड़े लक्ष्यों और बिजलीघरों जैसे नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले शामिल थे। योजना के तहत होने वाली बमबारी 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों से भी अधिक तीव्र हो सकती थी। हालांकि, ट्रंप की आपत्तियों के बाद इसे फिलहाल टाल दिया गया। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ट्रंप नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले एक नया युद्ध शुरू करने को लेकर आशंकित थे। उन्होंने पहले अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर भी कहा था कि वह 3 नवंबर तक ईरान पर हमले नहीं करेंगे।  हालांकि, इसके बाद ट्रंप ने ईरान को फिर चेतावनी दी कि यदि उसने तेजी से अपना रुख नहीं बदला, तो अमेरिका और इजराइल जल्द ही अपना अभियान पूरा कर देंगे।इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल हमले की योजना टलने के बावजूद ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रखा गया है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल ने नए हमले के लिए लक्ष्यों की अद्यतन सूची तैयार की थी। इसमें फरवरी के हमलों के दौरान निशाना नहीं बनाए गए ठिकाने भी शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइली अधिकारियों ने सोमवार को इजराइल पहुंचे अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में यह सूची प्रस्तुत की। इसमें परमाणु सुविधाओं के अतिरिक्त नागरिक बुनियादी ढांचे को भी शामिल किया गया था। रिपोर्ट में एक सूत्र ने कहा कि आने वाले हफ्तों में अमेरिका और इजराइल के दोबारा मिलकर हमला करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


 
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका का एक प्रमुख उद्देश्य ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े समझौते की अपनी शर्तें स्वीकार करने के लिए मजबूर करना हो सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। फरवरी से जारी संघर्ष और समुद्री आवाजाही पर लगी पाबंदियों ने इसे अंतरराष्ट्रीय तनाव का प्रमुख केंद्र बना दिया है। रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया, ”या तो समझौता होगा या हमला।” यह बयान इस ओर इशारा करता है कि कूटनीतिक बातचीत और सैन्य दबाव, दोनों विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

नेतन्याहू बोले- ईरान की सत्ता गिराना ही एकमात्र रास्ता-इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार को एक चुनावी सभा में ईरान की सरकार को सत्ता से हटाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि ईरान इजराइल को नष्ट करना चाहता था और परमाणु बम बनाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन इजराइल ने उसे रोका। इसके बावजूद, नेतन्याहू के अनुसार, ईरान से खतरा बना हुआ है।उन्होंने कहा कि इस खतरे को समाप्त करने का एकमात्र रास्ता ईरानी शासन को सत्ता से हटाना है। नेतन्याहू ने यह भी बताया कि उन्होंने इजराइली रक्षा बलों, मोसाद और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को इस संबंध में निर्देश दिया है। हालांकि, उन्होंने किसी संभावित कार्रवाई का समय या तरीका स्पष्ट नहीं किया।


ट्रंप से बातचीत का वीडियो  जारी किया-नेतन्याहू ने सोमवार को ट्रंप के साथ अपनी बातचीत का एक वीडियो भी जारी किया। इसमें वह अमेरिकी राष्ट्रपति से कहते सुनाई देते हैं कि ट्रंप ने कहा था कि अभी एक काम पूरा करना बाकी है और दोनों देश मिलकर उसे पूरा करेंगे। दोनों नेताओं की बयानबाजी से स्पष्ट है कि ईरान के खिलाफ दबाव बनाए रखने की नीति खत्म नहीं हुई है। फिलहाल बड़ा सैन्य अभियान टला है, लेकिन आगे समझौता होता है या नए हमले किए जाते हैं, यह आने वाले दिनों में अमेरिका और इजराइल के फैसलों पर निर्भर करेगा।

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