Shahar Samta News
चंबल नदी के पानी को लेकर राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच विवाद गहराता जा रहा है। दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर बढ़ती तकरार अब किसानों के आंदोलन का रूप लेती नजर आ रही है। पानी की कमी से जूझ रहे किसानों में नाराज़गी बढ़ रही है, जिसके चलते उन्होंने 13 जुलाई को महापड़ाव करने का ऐलान किया है।
किसानों का कहना है कि चंबल के पानी के उचित वितरण में असमानता बरती जा रही है, जिससे उनकी फसलें प्रभावित हो रही हैं। वहीं, इस मुद्दे पर दोनों राज्यों की सरकारें अपने-अपने पक्ष पर अड़ी हुई हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन सतर्क हो गया है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
अब सभी की नजर 13 जुलाई पर टिकी है, जब किसानों का महापड़ाव इस विवाद को और तेज कर सकता है।
हालांकि, राजस्थान सरकार का कहना है कि पत्र भेजे जाने के कई दिन बाद भी मध्यप्रदेश की ओर से कोई औपचारिक जवाब नहीं मिला है। सीएडी कोटा के अधीक्षण अभियंता संजय सिंह ने बताया कि विभाग लगातार मध्यप्रदेश के अधिकारियों के संपर्क में है, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अब इस विषय पर दोनों राज्यों के बीच उच्च स्तर पर बातचीत जारी है।
बताया जा रहा है कि इस विवाद की पृष्ठभूमि जून माह की एक घटना से जुड़ी है। उस समय मध्यप्रदेश सरकार ने चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के तहत स्थापित लिफ्ट इरिगेशन पाइपलाइन नेटवर्क की टेस्टिंग के लिए राजस्थान से 10 से 24 जून तक दाईं मुख्य नहर के पार्वती एक्वाडक्ट से 1200 क्यूसेक पानी छोड़ने का अनुरोध किया था। राजस्थान ने उस समय अपनी आवश्यकताओं का हवाला देते हुए पानी उपलब्ध नहीं कराया था। अब जब राजस्थान ने खरीफ फसलों के लिए पानी मांगा है, तो मध्यप्रदेश की ओर से भी अब तक सहमति नहीं दी गई है।
इस बीच पानी की कमी को लेकर किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। उनका कहना है कि समय पर सिंचाई नहीं मिलने से धान और अन्य खरीफ फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी मांग को लेकर किसान संगठनों ने 13 जुलाई को कोटा में सीएडी कार्यालय पर महापड़ाव करने का निर्णय लिया है। अब किसानों और कृषि क्षेत्र की नजर दोनों राज्यों के बीच चल रही उच्च स्तरीय वार्ता पर टिकी हुई है, जिससे इस विवाद का समाधान निकलने की उम्मीद की जा रही है।























