गंगानाथ झा परिसर में हिन्दी पखवाड़ा कार्यक्रम का समापन भावनाओं की अभिव्यक्ति का श्रेष्ठ माध्यम है हिन्दी भाषा-श्री उमेश चन्द्र श्रीवास्तव

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गंगानाथ झा परिसर में हिन्दी पखवाड़ा कार्यक्रम का समापन भावनाओं की अभिव्यक्ति का श्रेष्ठ माध्यम है हिन्दी भाषा-श्री उमेश चन्द्र श्रीवास्तव

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, गङ्गानाथ झा परिसर प्रयागराज में हिन्दी पखवाड़ा समापन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हिन्दी पखवाड़ा कार्यक्रम के अन्तर्गत परिसरीय कर्मचारियों हेतु विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। दिनांक 14-09-2026 से आरम्भ हिन्दी पखवाड़ा कार्यक्रम के अन्तर्गत आयोजित प्रतियोगिताओं में जहाँ संभाषण/काव्य प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अपने भाषा अभिव्यक्ति कौशल का प्रदर्शन किया वहीं हिन्दी ज्ञान प्रतियोगिता एवं हिन्दी टंकण प्रतियोगिता द्वारा कार्यालय में हिन्दी के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु इन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया । समापन कार्यक्रम में प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत कर उन सभी का उत्साहवर्धन किया गया। हिन्दी पखवाड़ा समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री उमेश चन्द्र श्रीवास्तव, वरिष्ठ साहित्यकार, मूर्धन्य पत्रकार एवं समाजसेवी रहे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री वीरेन्द्र पाठक, वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार, समाजसेवी रहे। श्री वीरेन्द्र पाठक ने अपने उद्बोधन में हिन्दी भाषा की सर्वव्यापकता को लोकप्रियता का मापदण्ड बताया। उन्होंने हिन्दी भाषा को सम्प्रेषण का माध्यम बताया तथा हिन्दी को विभिन्न भाषाओं को समाहित करने वाली व्यापक भाषा बताया। पत्रकारिता के अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने हिन्दी को भावनाओं की सहज अभिव्यक्ति करने वाली भाषा बताया। अँग्रेजी भाषा को मात्र प्रदर्शन का प्रतीक बताते हुए उन्होंने हिन्दी भाषा के अधिकाधिक प्रयोग करने को प्रेरित किया। उन्होंने हिन्दी में कार्य करने को प्राथमिकता देकर ही हिन्दी पखवाड़ा जैसे कार्यक्रमों की सार्थकता बताया। हिन्दी पत्रकारिता के स्थापित स्तम्भ के रूप में मुख्य अतिथि श्री उमेश चन्द्र श्रीवास्तव ने हिन्दी भाषा की विशालता एवं गम्भीरता से उपस्थित जनों को परिचित कराया। उन्होंने हिन्दी में बिन्दी के महत्व को कविता के माध्यम से व्यक्त किया। हिन्दी में भावों को व्यक्त करने की समृद्ध परम्परा से अवगत कराते हुए उन्होंने हिन्दी भाषा में लिखी अपनी कृतियों एवं उनमें छिपे मानवीय संवेदनाओं का विशेषत: उल्लेख किया। हिन्दी भाषा को भावप्रधान, रसप्रधान एवं अलंकार प्रधान भाषा के रूप में उन्होंने स्थापित किया। अपनी रचनाओं में गढ़ित चरित्रों का प्रमुखता से उल्लेख करते हुए उन्होंने अपनी कृतियों स्मृति एवं प्रकृति में वर्णित छन्दों का उल्लेख किया। चुनौतीपूर्ण लेखन की हिन्दी भाषा में अपार सम्भावनाएँ बताते हुये सभी को हिन्दी में लेखन एवं रचना करने को प्रेरित किया। “ज्ञान की गंग धारा बहेगी यहाँ ज्ञान चक्षुओं को बस खोलकर देखिये….” पंक्तियों के द्वारा उन्होंने हिन्दी के प्रति संवेदनशील होने की आवश्यकता पर बल दिया। “मनुष्य को मनुष्य बनाने के लिए कोई कारखाना चलाना चाहिए …..” जैसे काव्यपंक्तियों के द्वारा उन्होंने सभी श्रोतागणों को मन्त्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए परिसर के निदेशक प्रो. रामकृष्ण पाण्डेय “परमहंस” ने हिन्दी को किसी भी भाषा की प्रतिस्पर्धी न मानकर सभी भाषाओं की समावेशी भाषा बताया। हिन्दी भाषा में तद्भव, तत्सम, देशज एवं विदेशज जैसे चार प्रकार के शब्दों का उल्लेख करते हुए उन्होंने हिन्दी भाषा को विश्व की अनेक भाषाओं के शब्दों को अंगीकृत करने वाली भाषा बताया। इसके पूर्व परिसर के राजभाषा अधिकारी (प्रभारी) एवं कार्यक्रम के सहसंयोजक राजेश कान्त तिवारी ने समस्त उपस्थित जनों का स्वागत किया। उन्होंने परिसर में हिन्दी के प्रगामी प्रयोग से सम्बन्धित विवरण प्रस्तुत किया तथा नराकास -2 के सम्पादक मण्डल में सम्मिलित होने को परिसर की विशेष उपलब्धि भी बताया । हिन्दी को भावाभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बताते हुए उन्होंने हिन्दी के लिए “प्रेम स्नेह भरा है जिसमें, जिससे जुड़ी हर आशा है, मिश्री से भी मीठी है जो, हम सबकी हिन्दी भाषा है” जैसी पंक्तियों द्वारा सभी को हिन्दी भाषा की मिठास से परिचित कराया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. श्याम सुन्दर पाण्डेय ने हिन्दी पखवाड़ा के अन्तर्गत आयोजित प्रतियोगिताओं एवं उनके विजेताओं के नामों की घोषणा की। हिन्दी पखवाड़ा कार्यक्रम के अन्तर्गत आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मुख्यअतिथि एवं निदेशक महोदय के द्वारा सम्मानित करते हुए प्रमाणपत्र प्रदान किये गये तथा धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर सहनिदेशक प्रो. देवदत्त सरोदे, प्रो. अपराजिता मिश्रा, डॉ. मोनाली दास, डॉ. मंगलदेव त्रिपाठी, डॉ. अंजनी कुमार पुण्डरी, श्री अंकित मिश्र, श्री वरुण कुमार तिवारी, श्री संजय कुमार मिश्र, सुश्री अश्विनी लंके, अंजू मिश्रा, मंजू देवी समेत समस्त परिसरीय सदस्य उपस्थित रहे।

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