प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि पुलिस स्टेशनों में CCTV सिस्टम साल भर 24×7 चालू रहने चाहिए और जब ऐसी निगरानी व्यवस्था काम न कर रही हो, तो पुलिस को कुछ सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अगर CCTV काम नहीं कर रहा है तो पूछताछ या गिरफ्तारी के लिए लाए गए सभी लोगों की जानकारी तुरंत ‘जनरल डायरी’ (GD) में दर्ज की जानी चाहिए। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने राघवेंद्र दुबे और एक अन्य व्यक्ति के मामले की सुनवाई के दौरान ये बातें कहीं।
23 सितंबर के अपने आदेश में कोर्ट ने निर्देश दिया कि पुलिस स्टेशनों में CCTV सिस्टम 24/7 और 365 दिन चालू रहने चाहिए। कोर्ट ने कहा, ‘इस मामले के तथ्य, पहली नजर में साफ तौर पर दिखाते हैं कि पुलिसकर्मियों ने शिकायतकर्ता की ओर से रिकवरी एजेंट के तौर पर काम किया।’ याचिकाकर्ता के अनुसार रेत खनन समझौते को लेकर हुए विवाद के कारण उसे आसनसोल से गैर-कानूनी तरीके से उठाया गया और चित्रकूट के सरधुआ पुलिस स्टेशन लाया गया। राज्य ने तर्क दिया कि FIR दर्ज होने के बाद गैर-जमानती वारंट के आधार पर याचिकाकर्ता को गिरफ्तार किया गया था।
गिरफ्तारी मेमो में ‘भारी कमियों’ (जिसमें केवल पुलिसकर्मी ही गवाह थे) के कारण गिरफ्तारी को रद्द करते हुए बेंच ने उसे रिहा करने का आदेश दिया और 24 घंटे की गैर-कानूनी हिरासत के लिए 10,000 रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगर सिस्टम खराब हो जाता है, तो स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) को खराबी का सही समय दर्ज करते हुए GD में एंट्री करनी चाहिए और उस अधिकारी की पहचान करनी चाहिए जिसे लिखित रूप में खराबी की सूचना दी गई थी। साथ ही जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) को सूचित किया जाना चाहिए ताकि सिस्टम के बंद रहने का समय कम से कम हो और मरम्मत के कदमों का रिकॉर्ड रखा जा सके।
कोर्ट ने कहा, ‘इस मामले का एक और चिंताजनक पहलू जिस पर इस कोर्ट को ध्यान देना चाहिए, वह है ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या जिनमें पुलिस स्टेशन परिसर के भीतर CCTV कैमरों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रही है।’ बेंच ने आगे कहा, ‘CCTV के काम न करने के दौरान, हर संदिग्ध के आने का समय, जाने का समय और पूछताछ की जानकारी GD में दर्ज की जानी चाहिए। रिहाई के समय उस व्यक्ति या उसके निकटतम रिश्तेदार से हस्ताक्षरित रसीद ली जानी चाहिए।




















