नई दिल्ली। दिल्ली के सीमापुरी इलाके में बुधवार को एक बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया। अब तक 7 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली फायर कंट्रोल रूम को दोपहर करीब 3 बजकर 15 मिनट पर इमारत गिरने की सूचना मिली थी। कॉल मिलते ही दमकल की गाड़ियां और बचाव दल को मौके पर भेजा गया। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं। बताया जा रहा है कि करीब 25 गज के प्लॉट पर यह इमारत बनी हुई थी। बिल्डिंग के निचले हिस्से में दुकानें थीं, जबकि उसके ऊपर चार मंजिल का मकान बना हुआ था। हादसे के बाद आसपास के इलाके में भी लोगों की भीड़ जमा हो गई। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है।
दिल्ली में पहले भी हो चुके हैं कई बड़े बिल्डिंग हादसे-दिल्ली में इमारत गिरने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने से बड़ा हादसा हुआ था। इस घटना में 7 लोगों की मौत हुई थी। दक्षिण दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित यह इलाका घनी आबादी वाला है और यहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं रहते हैं। इसके अलावा दक्षिणी दिल्ली के साकेत इलाके में 30 मई को एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत गिर गई थी। इस इमारत में कोचिंग सेंटर, कैफे और कार्यालय संचालित हो रहे थे। हादसे में 6 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर छात्र बताए गए थे। 8 जुलाई को भारी बारिश के दौरान रोहिणी के सेक्टर-16 में भी निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत गिर गई थी। इस हादसे में 3 लोगों की जान चली गई थी।
मुकुंदपुर और करावल नगर में भी गिरे थे मकान-इससे पहले 2 जून को उत्तर दिल्ली के मुकुंदपुर इलाके में एक अवैध फैक्ट्री एलपीजी सिलेंडर में विस्फोट के बाद ढह गई थी। इस हादसे में 11 मजदूर घायल हुए थे। इसके अगले ही दिन उत्तर-पूर्वी दिल्ली के करावल नगर में चार मंजिला इमारत गिर गई थी। हालांकि, इस हादसे में किसी की जान नहीं गई थी।
जर्जर इमारतों को लेकर उठते रहे हैं सवाल-सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में जर्जर और खतरनाक इमारतों को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। हादसे के बाद सरकार ने ऐसी इमारतों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी। हालांकि, दिल्ली के कई इलाकों में पुरानी और जर्जर इमारतों की बड़ी संख्या होने के कारण इन्हें चिन्हित करने और कार्रवाई की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। सत्य निकेतन हादसे के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाया था। कोर्ट ने एमसीडी और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए जिम्मेदारी से बचने पर सवाल उठाए थे। अब सीमापुरी में हुए ताजा हादसे ने एक बार फिर दिल्ली की पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।




















