नई दिल्लीः केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना’ के लिए 7,395 करोड़ रुपये के आवंटन को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे पहले से तय योजनाओं से हटकर स्थानीय स्तर पर क्षमता निर्माण और योजना बनाने पर केंद्रित मॉडल की ओर बड़ा बदलाव बताया। वैष्णव ने कहा कि इस योजना से पंचायतें अपने उपलब्ध संसाधनों और विकास में आने वाली बाधाओं की पहचान कर सकेंगी और अपनी विशिष्ट जरूरतों के आधार पर विकास योजनाएं तैयार कर सकेंगी। मंत्री ने कहा, ”यह एक बड़ा बदलाव है।”
उन्होंने बताया कि इस दृष्टिकोण के तहत स्थानीय संस्थाओं को अपनी विकास योजनाएं बनाने में सक्षम बनाने पर जोर दिया जाएगा। वैष्णव ने बताया कि इस योजना के एक प्रमुख उद्देश्य के तहत निर्वाचित प्रतिनिधियों के कामकाज और शासन संबंधी क्षमताओं में सुधार के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत वित्त आयोग के अनुदानों का बेहतर उपयोग करने और पंचायतों के अपने राजस्व के स्रोतों को बढ़ाने के माध्यम से उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि वे अधिक आत्मनिर्भर बन सकें।
पंचायती राज मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में इसे ”विकसित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप शासन व्यवस्था में बदलाव की अगली पीढ़ी की पहल” बताया। इस योजना को 2026-27 से 2030-31 तक लागू करने की मंजूरी दी गई है। योजना के लिए 7,395.55 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जिसमें केंद्र की हिस्सेदारी 4,869.48 करोड़ रुपये और राज्यों की हिस्सेदारी 2,526.07 करोड़ रुपये है।




















