चीन की कम्युनिस्ट पार्टी में बड़े पैमाने पर फेरबदल, रिकॉर्ड संख्या में वरिष्ठ अधिकारी बाहर

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चीन की कम्युनिस्ट पार्टी में बड़े पैमाने पर फेरबदल, रिकॉर्ड संख्या में वरिष्ठ अधिकारी बाहर

चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने आंतरिक अनुशासन को और सख्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस सप्ताह हुई पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक में रिकॉर्ड संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। बड़े पैमाने पर हुई बर्खास्तगी और संगठनात्मक फेरबदल के कारण पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में सदस्यों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग के मौजूदा नेतृत्व के गठन के बाद यह पार्टी का पांचवां पूर्ण अधिवेशन (प्लेनम) था। बैठक में वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में बीजिंग में 21वीं पार्टी कांग्रेस आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इस कांग्रेस के साथ चीन में नेतृत्व परिवर्तन की पांच वर्षीय राजनीतिक प्रक्रिया शुरू होगी। माना जा रहा है कि इस दौरान शी जिनपिंग अपने राष्ट्रपति कार्यकाल को एक और पांच साल के लिए बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं।

केंद्रीय समिति के एक-चौथाई से अधिक सदस्य अनुपस्थित——–

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति देश की प्रमुख नीतियों और राजनीतिक फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस बार की बंद कमरे में हुई बैठक में माओत्से तुंग के बाद के दौर में सबसे बड़ी संख्या में सदस्य अनुपस्थित रहे।

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, बैठक में केंद्रीय समिति के 279 पूर्ण और वैकल्पिक सदस्य शामिल हुए, जबकि वर्ष 2022 में इनकी कुल संख्या 376 थी। इस तरह मूल सदस्य संख्या के मुकाबले 25.8% से अधिक सदस्य बैठक में मौजूद नहीं थे। इनमें कई ऐसे अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं, जिन्हें भ्रष्टाचार और अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत पदों से हटाया गया है।

विश्लेषकों के मुताबिक, इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों की अनुपस्थिति राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान और पार्टी के भीतर जारी व्यापक राजनीतिक फेरबदल के प्रभाव को दर्शाती है। हालांकि, बड़े पैमाने पर हुई कार्रवाई के बावजूद कम्युनिस्ट पार्टी ने अपनी एकता और संगठनात्मक मजबूती का दावा किया है। पार्टी ने अपनी उपलब्धियों को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि उन्हें मार्क्सवादी राजनीतिक दलों के निर्माण के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।

अमेरिका से अलग एकजुटता का संदेश देना चाहती है पार्टी—-

किंग्स कॉलेज लंदन के लाउ चाइना इंस्टीट्यूट के निदेशक केरी ब्राउन के अनुसार, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी इस बैठक के जरिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एकजुटता का संदेश देना चाहती है। ब्राउन ने कहा कि पार्टी यह दिखाना चाहती है कि उसका नेतृत्व एकजुट और अनुशासित है। उन्होंने अमेरिका में जारी मध्यावधि चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां राजनीतिक विभाजन और टकराव की स्थिति और गहरी हो सकती है। उनके मुताबिक, ऐसे माहौल में शी जिनपिंग और उनके सहयोगी दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि चीन का राजनीतिक नेतृत्व अमेरिका की तुलना में अधिक संगठित और अनुशासित है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को बताया पार्टी के अस्तित्व का सवाल–

शी जिनपिंग ने वर्ष 2012 में सत्ता संभालने के कुछ ही दिनों बाद कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि भ्रष्टाचार पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इससे अंततः पार्टी और देश की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है। इसके बाद शी ने भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया। इस अभियान को माओत्से तुंग के दौर के बाद चीन में सबसे बड़े अनुशासनात्मक अभियानों में से एक माना जाता है।

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