नेपाल में उग्र हुआ ZenG आंदोलन: 3 दिन में 3 आत्मदाह, PM बालेन पर इस्तीफे का दबाव

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shahar samta news

नेपाल में एक बार फिर युवाओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। पिछले तीन दिनों में तीन युवाओं द्वारा आत्मदाह किए जाने की घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इनमें दो युवकों की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से अस्पताल में भर्ती है। इन घटनाओं के बाद राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं और प्रधानमंत्री बालेन शाह के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?
विरोध प्रदर्शन की शुरुआत 25 वर्षीय राइड-शेयर चालक गणेश नेपाली की मौत के बाद हुई। गणेश का नगर पुलिस के साथ नो-पार्किंग को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि नगर निगम अधिकारियों ने उनकी बाइक को व्हील-लॉक कर टो करने की तैयारी की, जिससे वह बेहद आहत हो गए। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, गणेश बाद में पेट्रोल लेकर लौटे और अधिकारियों के सामने खुद को आग लगा ली। गंभीर रूप से झुलसे गणेश नेपाली की अगले दिन अस्पताल में मौत हो गई। उन्हें इलाज के लिए नई दिल्ली के AIIMS ले जाने की योजना भी बनाई गई थी, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी हालत को देखते हुए इसकी अनुमति नहीं दी।

तीन दिनों में तीन आत्मदाह
गणेश नेपाली की मौत के बाद दो और आत्मदाह की घटनाएं सामने आईं। विवेक मंडल (35) ने सरलाई जिले में आत्मदाह का प्रयास किया और अस्पताल में भर्ती हैं।
अश्विन राउत (45) ने काठमांडू के बुद्धनगर में खुद को आग लगा ली, जिनकी बाद में मौत हो गई। इन घटनाओं ने पूरे नेपाल में आक्रोश की लहर पैदा कर दी। इसके विरोध में काठमांडू के मैतीघर मंडला समेत कई इलाकों में हजारों युवाओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने “तानाशाही सरकार मुर्दाबाद”, “पीड़ित परिवार को न्याय दो” और “ट्रैफिक आतंक बंद करो” जैसे नारे लगाए। राइड-शेयर चालक, छात्र संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और गणेश नेपाली के गृह जिले के लोग भी आंदोलन में शामिल हुए।

PM बालेन शाह के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार युवाओं की समस्याओं, बेरोजगारी और प्रशासनिक दमन को लेकर पूरी तरह विफल रही है। Gen Z आंदोलन से जुड़े संगठनों ने प्रधानमंत्री बालेन शाह पर जनविरोधी और निरंकुश रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है।नेपाली कांग्रेस की सांसद बसना थापा ने कहा कि जब एक युवा सरकारी उत्पीड़न से तंग आकर खुद को आग लगा रहा था, तब सरकार मूकदर्शक बनी रही। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि अब “काला चश्मा उतारकर जनता की पीड़ा देखिए।”

2023 के बयान पर घिरे बालेन शाह
विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने 2023 की उस घटना का भी जिक्र किया, जब प्रेम आचार्य ने आत्मदाह किया था। उस समय बालेन शाह ने इसे सरकार की “चरम विफलता” बताया था। अब मौजूदा घटनाओं पर उनकी चुप्पी को लेकर विपक्ष और प्रदर्शनकारी लगातार सवाल उठा रहे हैं।  प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार युवाओं के लिए रोजगार, आय बढ़ाने और जीवन स्तर सुधारने के लिए कोई ठोस नीति नहीं ला सकी है।

लगातार बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और प्रशासनिक कार्रवाई ने युवाओं में असंतोष बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार ने जल्द ही प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया और युवाओं की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो नेपाल में विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक अस्थिरता दोनों बढ़ सकते हैं। वर्तमान हालात प्रधानमंत्री बालेन शाह सरकार के लिए अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बनते जा रहे हैं।

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