शहर समता न्यूज़
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशों के बीच सात दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को लेकर गतिरोध बना हुआ है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि तेहरान ने अपने प्रस्ताव पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शुरुआती प्रतिक्रिया देख ली है, लेकिन वह अभी मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के अंतिम रुख का इंतजार कर रहा है। ईरान का कहना है कि इसके बाद ही वह आगे का फैसला करेगा। संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर ईरानी सरकारी प्रसारक और समाचार एजेंसी के पत्रकारों से बातचीत में अराघची ने कहा कि ईरान ने बैठकों के दौरान अपनी योजनाओं को विस्तार से समझाया और उन योजनाओं को मध्यस्थों के जरिए अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाया गया।
उन्होंने कहा कि ईरान को अमेरिकी राष्ट्रपति की पहली प्रतिक्रिया के बारे में जानकारी है, लेकिन मध्यस्थों की ओर से अभी अंतिम राय नहीं पहुंची है। अराघची ने ट्रंप के बयानों को कभी सकारात्मक तो कभी विरोधाभासी बताते हुए कहा कि ईरान मध्यस्थों के जरिए स्पष्ट और अंतिम जवाब मिलने का इंतजार कर रहा है। इसके बाद ही तेहरान अपना निर्णय लेगा। वार्ता में सबसे बड़ा मुद्दा रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का है। अराघची ने स्पष्ट किया कि इस जलमार्ग को खोलने और बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए ईरान की शर्तों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि इन शर्तों को ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने तय किया है। मध्यस्थों के साथ हुई सभी बैठकों में ईरान ने इन शर्तों को स्पष्ट रूप से रखा, समझाया और उनका बचाव किया। अराघची के अनुसार, मध्यस्थों ने भी इन बातों को अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाया है।
अराघची ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की दिशा में कोई भी कदम तभी उठाया जाएगा जब ईरान की निर्धारित शर्तें पूरी होंगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि तेहरान इन शर्तों से पीछे नहीं हटेगा। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि उनका देश बातचीत के जरिए समाधान का समर्थन करता है, लेकिन इसके साथ वह अपने अधिकारों और अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेगा। अराघची के मुताबिक, ईरान ने हर बैठक में अपनी स्थिति, नीतियों और शर्तों को मजबूती से रखा है और कूटनीतिक रास्ते के लिए कई योजनाएं पेश की हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे दुनिया को यह संदेश गया है कि ईरान ने सैन्य दबाव के साथ-साथ कूटनीतिक मोर्चे पर भी अपनी स्थिति मजबूती से रखी है। उन्होंने कहा कि ईरान ने कूटनीति का रास्ता कभी बंद नहीं किया। साथ ही उसने अपने अधिकारों को भी छोड़ा नहीं है।



















