नई दिल्लीः भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 8 अक्टूबर को भारी बिकवाली देखने को मिल रही है। सेंसेक्स और निफ्टी करीब 1 फीसदी तक टूट गए। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और RBI के सख्त रुख से निवेशकों की चिंता बढ़ी है।सेंसेक्स 661.50 अंक यानी 0.91 फीसदी गिरकर 71,977.20 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी-50 में 242.15 अंक यानी 1.07 फीसदी की गिरावट रही और यह 22,360.90 के स्तर पर पहुंच गया।
बैंकिंग और मिडकैप शेयरों पर भी दबाव-
बाजार की गिरावट का असर बैंकिंग और मिडकैप शेयरों पर भी दिखाई दिया। निफ्टी बैंक 270.60 अंक यानी 0.49 फीसदी गिरकर 54,784.95 पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी मिडकैप-100 में 801.55 अंक यानी 1.34 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स को छोड़कर ज्यादातर सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
Paytm और MobiKwik के शेयरों में 7% तक गिरावट-
फिनटेक कंपनियों के शेयरों में भी तेज बिकवाली देखने को मिली। Paytm और MobiKwik के शेयर करीब 7 फीसदी तक टूट गए, जबकि Pine Labs में लगभग 3.1 फीसदी की गिरावट रही।
इन कंपनियों के शेयरों पर UPI मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने की तारीख टलने की खबरों का असर माना जा रहा है।
ITC के शेयर भी करीब 3 फीसदी गिर गए। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 44 लाख शेयरों से जुड़ी 12 ब्लॉक डील्स डिस्काउंट पर होने के बाद स्टॉक में दबाव देखने को मिला।
बाजार गिरने की 4 बड़ी वजहें
1. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और फारस की खाड़ी व होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों की खबरों के बीच ब्रेंट क्रूड 2 फीसदी से ज्यादा चढ़कर करीब 102.2 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगे क्रूड से महंगाई और व्यापार घाटे को लेकर चिंता बढ़ती है।
2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। बुधवार को FIIs ने भारतीय शेयर बाजार में 6,100 करोड़ रुपये से ज्यादा की शुद्ध बिकवाली की थी।
3. RBI का सख्त रुख
RBI ने हालिया मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया। केंद्रीय बैंक के सख्त रुख से ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी है।
4. कमजोर वैश्विक संकेत
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स के बाद वैश्विक बाजारों में भी दबाव देखने को मिला। कई एशियाई बाजारों में कमजोरी रही, जबकि अमेरिकी वायदा बाजार भी गिरावट के संकेत दे रहे थे।
कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी फंड की निकासी और वैश्विक बाजारों के कमजोर संकेतों के बीच घरेलू बाजार में फिलहाल बिकवाली का दबाव बना हुआ है।




















