बांग्लादेश में 2024 में बड़े पैमाने पर हुए जनविद्रोह के बाद सत्ता से बेदखल की गईं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने ‘ द एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) से कहा है कि वह अगले महीने (भारत में) निर्वासन से स्वदेश वापसी के अपने इरादे पर कायम हैं। हसीना ने यह बात ऐसे समय कही है, जब उनकी सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई घातक कार्रवाई के मामले में उन्हें मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध-प्रदर्शनों के कारण सत्ता से हटाए जाने के बाद हसीना भारत आ गई थीं और तब से वह वहीं रह रही हैं। बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने 2025 में उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध के लिए मौत की सजा सुनाई।
अदालत ने माना कि वह उस कार्रवाई का आदेश देने के लिए जिम्मेदार थीं जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों अन्य घायल हो गए। संयुक्त राष्ट्र ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि इस दौरान लगभग 1,400 लोग मारे गए थे। हसीना ने किसी भी तरह की गलत कार्रवाई से इनकार किया है। उन्होंने न्यायाधिकरण के फैसले को भी खारिज कर दिया है और इस मुकदमे की वैधता को चुनौती दी है। बांग्लादेश ने कई बार हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है, लेकिन भारत ने उन्हें सौंपने से इनकार कर दिया है। उन्होंने पहली बार अगस्त में दिसंबर में देश लौटने का इरादा जताया था।
ईमेल के जरिए पूछे गए सवालों के जवाब में उन्होंने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ से कहा, ”अगर मेरी किस्मत में मौत लिखी है तो मैं अपने ही देश की मिट्टी पर अपने ही लोगों के बीच मरना पसंद करूंगी।” उन्होंने कहा, ”इसलिए मैं बांग्लादेश वापस आऊंगी। मेरा यह फैसला नहीं बदला है।” पिछले हफ्ते उनसे कुछ सवाल पूछे गए थे, जिनका जवाब उन्होंने बुधवार को दिया। वर्ष 2009 से 2024 तक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं हसीना ने भारत से वापसी की योजना का खुलासा नहीं किया। बांग्लादेश पहुंचने पर उन्हें गिरफ्तार भी किया जा सकता है।






















