चढ़ावा किसी की निजी जागीर नही- राम मंदिर मामले में कांग्रेस ने उठाई जवाबदेही की मांग

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चढ़ावा किसी की निजी जागीर नही- राम मंदिर मामले में कांग्रेस ने उठाई जवाबदेही की मांग

नई दिल्लीः राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर अपना हमला तेज करते हुए, कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि चंदा और चढ़ावा देश की आस्था है, किसी की निजी जागीर नहीं तथा इसकी चोरी का पूरा सच देश के सामने आना चाहिए और दोषियों को कानून के अनुसार दंडित किया जाए। विपक्षी दल ने इस मुद्दे पर तीन सवाल भी किए।

पार्टी ने पूछा, ”क्या आठ लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल होना ही पर्याप्त है? पूरे (श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र) ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन की स्वतंत्र जांच क्यों नहीं होनी चाहिए? सरकार उच्चतम न्यायालय की निगरानी में आगे की पड़ताल और जवाबदेही तय करने से क्यों पीछे हट रही है?” कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर ‘चंदा चोरी, आस्था धोखा’ शीर्षक वाले पोस्ट में लिखा, ”चोरी पर पर्दा डालने की कोशिश में सरकार के अपने ही बयान अब उससे सवाल पूछ रहे हैं। सरकार ने उच्चतम न्यायालय में अपनी ही कहानी के ऐसे तथ्य रख दिए हैं, जिनसे सवाल और गहरे हो गए हैं।”

रमेश ने कहा कि देश की जनता के मन में सवाल है कि प्रधानमंत्री (नरेन्द्र) मोदी और मुख्यमंत्री (योगी) आदित्यनाथ मौन साधकर चोरों को मूक समर्थन क्यों दे रहे हैं? उन्होंने सवाल किया कि पहले दिन से चंदा-चढ़ावा चोरी के पाप पर पर्दा डालने की कोशिश क्यों हो रही है? उन्होंने कहा, ”सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पहली एसआईटी (विशेष जांच दल) राज्य सरकार ने खुद बनाई थी, वह भी ट्रस्ट के अनुरोध पर। 13 जून 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की। इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट 23 जून को तत्कालीन अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी गई, जिनके ट्रस्ट से पदेन सदस्य के रूप में जुड़े होने की बात भी सामने आई है।”

रमेश ने उल्लेख किया कि 6 जुलाई 2026 को ट्रस्ट की बैठक में इस रिपोर्ट पर चर्चा हुई थी, जिसके बाद कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि ट्रस्ट के लोगों ने कोई विश्वासघात नहीं किया। रमेश ने बताया कि गिरि ने चम्पत राय के चरित्र पर भरोसा जताते हुए उनकी ”सेवाओं का अभिनंदन” किया। यानी जांच में गंभीर सवाल उठने के बावजूद ट्रस्ट नेतृत्व ने भाजपा-आरएसएस-विहिप से जुड़े अपने लोगों का सार्वजनिक रूप से बचाव किया। शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप के बाद गठित दूसरी एसआईटी का उल्लेख करते हुए कांग्रेस महासचिव ने कहा कि 27 जुलाई 2026 को न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस महानिरीक्षक किरण एस के नेतृत्व में इस एसआईटी की जांच में फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल किया गया।

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